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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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Page 632

श्वेत चरणों वाली गौ हमारे शत्रुओं की उस सेना को शोक प्रदान करने के लिए जाए
और हमारे बाणों से पीड़ित उस सेना पर टूट पड़े. हे न्यर्बुदि! सामने दिखाई देने वाली यह
सेना आज युद्ध के समय मोह को प्राप्त हो जाए. (२०)
मूढा अमित्र न्यर्बुदे जह्योषां वरंवरम्. अनया जहि सेनया.. (२१)
हे न्यर्बुदि! तुम हमारे शत्रुओं को अपनी माया के कर्तव्य और अकर्तव्य जानने के लिए
मूर्ख बना दो. तुम इस सेना के श्रेष्ठों को नष्ट कर दो. तुम्हारी कृपा से हमारी सेना विजय प्राप्त
करे. (२१)
यश्च कवची यश्चाकवचो ३ मित्रो यश्चाज्मनि.
ज्यापाशैः कवचपाशैरज्मनाभिहतः शयाम्.. (२२)
हमारा जो शत्रु कवच धारण किए है अथवा जो कवच रहित है, हमारे जो शत्रु रथ में
बैठे हैं, वे अपनेअपने पाशों से बंधे हुए सो जाएं. (२२)
ये वर्मिणो ये ऽ वर्माणो अमित्र‍ा ये च वर्मिणः.
सर्वांस्ताँ अर्बु दे हतांछ्वानो ऽ दन्तु भूम्याम्.. (२३)
हमारे जो शत्रु कवच धारण करने वाले, कवचहीन और कवच के अतिरिक्त अन्य शस्त्र
से रक्षा करने वाले साधन से युक्त हैं, हे न्यर्बुदि! तुम्हारे द्वारा मारे गए उन शत्रुओं को कुत्ते
आदि मांसभक्षी पशु खाएं. (२३)
ये रथिनो ये अरथा असादा ये च सादिनः.
सर्वानदन्तु तान् हतान् गृध्राः श्येनाः पतत्रिणः (२४)
हमारे जो शत्रु रथ में बैठे हैं, जो रथहीन हैं, जो घोड़े पर सवार हैं और जो बिना घोड़े
वाले हैं, उन सब को गिद्ध, बाज तथा अन्य मांसभक्षी पक्षी खाएं. (२४)
सहस्रकुणपा शेतामामित्री सेना समरे वधानाम्. विविद्धा ककजाकृता..
(२५)
हमारे शत्रुओं की सेना हमारी सेना को प्राप्त कर के आयुध साधनों की युद्ध में भिड़ंत
होने पर मरी हुई एवं अनगिनती लाशों वाली हो. (२५)
मर्माविधं रोरुवतं सुपर्णैरदन्तु दुश्चितं मृदितं शयानम्.
य इमां प्रतीचीमाहुतिममित्रो नो युयुत्सति.. (२६)
शोभन पतन वाले बाणों के द्वारा मर्मस्थलों में विद्ध एवं अत्यधिक रोते हुए दुःखों से
पूर्ण, चूर्ण किए हुए और धरती पर पड़े हुए शत्रु सैनिकों को गीदड़ आदि मांसभक्षी पशु खाएं.
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