अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextहे बृहस्पति देव! इंद्र और प्रजापति देव के साथ जो आपने प्रतिज्ञा की है. मैं उस देव
सेना को उस संग्राम में बुलाता हूं. हे बुलाए गए देव! हमारी सेना को विजय प्रदान करो.
हमारे शत्रु सैनिकों को विजय मत प्रदान करो. (९)
बृहस्पतिराङ्गिरस ऋषयो ब्रह्मसंशिताः.
असुरक्षयणं वधं त्रिषन्धिं दिव्याश्रयन्.. (१०)
अंगिरा ऋषि के पुत्र बृहस्पति जो देवों के मंत्री हैं, वेद मंत्रों के अभ्यास से शक्तिशाली
बनें अन्य ऋषियों ने असुरों का नाश करने वाले आयुध वज्र को द्युलोक अर्थात् स्वर्ग में स्थित
किया है. (१०)
येनासौ गुप्त आदित्य उभाविन्द्रश्च तिष्ठतः.
त्रिषन्धिं देवा अभजन्त्तौजसे च बलाय च.. (११)
जिस वज्र के द्वारा दिखाई देने वाले आदित्य अर्थात् सूर्य को स्वर्ग में पाला गया है,
जिस वज्र की शक्ति के कारण आदित्य और इंद्र दोनों अपनेअपने स्थान पर स्थित हैं, उस
त्रिषंधि नाम के देव अर्थात् वज्र की सभी देवों ने तेज और बल की प्राप्ति के लिए सेवा की है.
(११)
सर्वॉल्लोकान्तसमजयन् देवा आहुत्यानया.
बृहस्पतिराङ्गिरसो वज्रं यमसिञ्चतासुरक्षयणं वधम्.. (१२)
अंगिरा ऋषि के पुत्र एवं देवों के मंत्री बृहस्पति ने तथा इंद्र आदि देवों ने इस आहुति के
द्वारा असुरों को मार कर सभी लोकों को प्राप्त किया है. बृहस्पति ने असुरों का विनाश करने
के साधन उस वज्र को इस आहुति के द्वारा ही बनाया है. (१२)
बृहस्पतिराङ्गिरसो वज्रं यमसिञ्चतासुरक्षयणं वधम्.
तेनाहममूं सेनां नि लिम्पामि बृहस्पते ऽ मित्रान हन्म्योजसा.. (१३)
अंगिरा ऋषि के पुत्र एवं देवों के मंत्री बृहस्पति ने तथा इंद्र आदि देवों ने असुरों का वध
करने वाले जिस वज्र की रचना घृत की आहुति से की है, हे देवो! उस वज्र के द्वारा मैं अपनी
शत्रु सेना का विनाश करता हूं. सेना के विनाश के कारण मैं अपने शत्रुओं का विनाश अपने
बल से करूं. (१३)
सर्वे देवा अत्यायन्ति ये अश्नन्ति वषट् कृतम्.
इमां जुषध्वमाहुतिमितो जयत मामुतः.. (१४)
इंद्र आदि सभी देव हमारे शत्रुओं को छोड़ कर हमारे सामने आएं. वे देव वषट् शब्द के
साथ दिए गए हवि का भोग करते हैं. वे सब हमारी उस आहुति का सेवन करें. उस आहुति से
प्रसन्न सभी देव हमारी सेनाओं को विजयी बनाएं. हमारे शत्रुओं की सेनाओं को विजयी न
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