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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 612 of 1063

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Page 612

आदित्या रुद्रा वसवो दिवि देवा अथर्वाणः.
अङ्गिरसो मनीषिणस्ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (१३)
आदित्य, रुद्र और वसु देव स्वर्ग में निवास करते हैं. जो देव पृथ्वी पर शक्तिशाली हैं, वे
हमें पाप से मुक्त करें. वेद मंत्रों के दृष्टा अंगिरा गोत्रीय ऋषि तथा मनीषी पाप से हमारी रक्षा
करें. (१३)
यज्ञं ब्रूमो यजमानमृचः सामानि भेषजा.
यजूंषि होत्रा ब्रूमस्ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (१४)
हम यज्ञ की, यजमान की, ऋचाओं की, सामवेद के मंत्रों की, यजुर्वेद के मंत्रों तथा इन
वेदों में बताई गई ओषधियों एवं होताओं की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (१४)
पञ्च राज्यानि वीरुधां सोमश्रेष्ठानि ब्रूमः.
दर्भो भङ्गो यवः सहस्ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (१५)
फल पकने पर उन्नत होने वाली जड़ीबूटियों और फसलों में जो पांच श्रेष्ठ हैं और इन के
राजा हैं, हम उन की स्तुति करते हैं. दर्भ भाग, जौ और सह नाम की विशेष ओषधि की स्तुति
करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (१५)
अरायान् ब्रूमो रक्षांसि सर्पान् पुण्यजनान् पितॄन्.
मृत्यूनेकशतं ब्रूमस्ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (१६)
हम दान के प्रतिबंधक हिंसकों, राक्षसों, सर्पों, यातुधानों और पितरों की स्तुति करते हैं.
मैं एक से एक मृत्युओं की स्तुति करता हूं. वे मुझे पाप से मुक्त करें. (१६)
ऋतून्र् ब्रूम ऋतुपतीनार्तवानुत हायनान्.
समाः संवत्सरान् मासांस्ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (१७)
हम ऋतुओं की, ऋतुओं के स्वामियों की, ऋतुओं से संबंधित पदार्थों की, अर्थात् चंद्र
वर्षों की, सूर्य वर्षों की, संवत्सरों की तथा मासों की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें.
(१७)
एत देवा दक्षिणतः पश्चात् प्राञ्च उदेत.
पुरस्तादुत्तराच्चक्रा विश्वे देवाः समेत्य ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (१८)
हे दक्षिण दिशा में स्थित देवो! तुम आओ. चारों दिशाओं में स्थित सभी देव यहां यज्ञ में
आ कर हमें पाप से मुक्त करें. (१८)
विश्वान् देवानिदं ब्रूमः सत्यसंधानृतावधः.