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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 610 of 1063

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Page 610

तानि कल्पद् ब्रह्मचारी सलिलस्य पृष्ठे तपो ऽ तिष्ठत् तप्यमानः समुद्रे.
स स्नातो बभ्रुः पिङ्गलः पृथिव्यां बहु रोचते.. (२६)
ब्रह्मचारी उन अन्न आदि को उत्पन्न करता हुआ, जल के ऊपर तपस्या करता हुआ
सागर पर वर्तमान रहता है. स्नान से पवित्र हुआ एवं कबरे रंग के साथ पीले रंग का होता
हुआ पृथ्वी पर अधिक दीप्त होता है. अर्थात् अधिक चमकता है (२६)
सूक्त-८ देवता—अग्नि
अग्निं ब्रूमो वनस्पतीनोषधीरुत वीरुधः.
इन्द्रं बृहस्पतिं सूर्यं ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (१)
हम अग्नि की, वनस्पतियों की, जड़ीबूटियों और फसलों की, वृक्षों की, इंद्र की,
बृहस्पति की तथा सूर्य की स्तुति करते हैं. वे हमें सभी पापों से मुक्त करें. (१)
ब्रूमो राजानं वरुणं मित्रं विष्णुमथो भगम्.
अंशं विवस्वन्तं ब्रूमस्ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (२)
हम तेजस्वी वरुण की, मित्र की, विष्णु की, भग की, अंश और विवस्वान् अर्थात् सूर्य
की स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (२)
ब्रूमो देवं सवितारं धातारमुत पूषणम्.
त्वष्टारमग्रियं ब्रूमस्ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (३)
हम दानादि गुणों से युक्त सविता, धाता, पूषा, त्वष्टा और अग्नि की स्तुति करते हैं. वे
हमें पाप से मुक्त करें. (३)
गन्धर्वाप्सरसो ब्रूमो अश्विना ब्रह्मणस्पतिम्.
अर्यमा नाम यो देवस्ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (४)
हम प्रथम गिने जाने वाले गंधर्वों की, अप्सराओं की, अश्विनीकुमारों की, त्वष्टा की
स्तुति करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (४)
अहोरात्रे इदं ब्रूमः सूर्याचन्द्रमसावुभा.
विश्वानदित्यान् ब्रूमस्ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (५)
हम दिनरात तथा सूर्य चंद्रमा दोनों की स्तुति करते हैं. हम सभी आदित्यों की स्तुति
करते हैं. वे हमें पाप से मुक्त करें. (५)
वातं ब्रूमः पर्जन्यमन्तरिक्षमथो दिशः.