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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 56 of 1063

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Page 56

सीसं म इन्द्रः प्रायच्छत् तदङ्ग यातुचातनम्.. (२)
वरुण देव ने फेन के विषय में कहा है. सीसे जस्ते के विषय में अग्नि ने भी यही कहा है.
परम ऐश्वर्ययुक्त इंद्र ने मुझे सीसा प्रदान किया है. इंद्र ने कहा है कि हे प्रिय! यह सीसा राक्षसों
का संहार करने वाला है. (२)
इदं विष्कन्धं सहत इदं बाधते अत्रिणः.
अनेन विश्वा ससहे या जातानि पिशाच्याः.. (३)
यह सीसा राक्षस, पिशाच आदि द्वारा डाले जाने वाले विघ्नों को समाप्त करने वाला है.
यह मनुष्यों का भक्षण करने वाले राक्षसों को नष्ट करता है. मैं इस सीसे के द्वारा सभी राक्षसों
को पराजित करता हूं. वे राक्षस पिशाची से उत्पन्न हैं. (३)
यदि नो गां हंसि यद्यश्वं यदि पूरुषम्.
तं त्वा सीसेन विध्यामो यथा नो ऽ सो अवीरहा.. (४)
हे शत्रु! यदि तू हमारी गायों, घोड़ों एवं सहायता करने वाले सेवकों की हत्या करता है
तो मैं सीसे से तुझे मारूंगा. तू मेरे वीरों की हत्या नहीं कर सकेगा. (४)
सूक्त-१७ देवता—स्त्रियां एवं धर्मपत्नियां
अमूर्या यन्ति योषितो हिरा लोहितवाससः.
अभ्रातर इव जामयस्तिष्ठन्तु हतवर्चसः.. (१)
स्त्रियों की लाल रक्त प्रवाहिनी जो नाड़ियां रोग के कारण सदा प्रवाहित होती रहती हैं,
वे रोग नष्ट हो जाने के कारण इस प्रकार रुक जाएं, जिस प्रकार बिना भाइयों वाली बहनें
ससुराल न जा कर अपने पिता के घर में ही रुक जाती हैं. (१)
तिष्ठावरे तिष्ठ पर उत त्वं तिष्ठ मध्यमे.
कनिष्ठिका च तिष्ठति तिष्ठादिद्धमनिर्मही.. (२)
हे शरीर के निचले भाग में वर्तमान नाड़ी! हे शरीर के ऊपरी भाग में स्थित नाड़ी! हे
शरीर के मध्य भाग में वर्तमान नाड़ी! तू भी स्थिर हो जा. रुधिर का प्रवाह बंद करने के लिए
छोटी और बड़ी सभी नाड़ियां स्थिर हो जाएं. (२)
शतस्य धमनीनां सहस्रस्य हिराणाम्.
अस्थूरिन्मध्यमा इमाः साकमन्ता अरंसत.. (३)
हृदय संबंधी सैकड़ों धमनियां, हजारों शिराएं एवं उन की मध्यवर्ती रक्तवाहिनी
नाड़ियां इस मंत्र के प्रभाव से खून बहाना बंद कर दें. शेष नाड़ियां पूर्ववत रक्त प्रवाह
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