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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 553 of 1063

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Page 553

एकं यदङ्गमकृणोत् सहस्रधा कियता स्कम्भः प्र विवेश तत्र.. (९)
कितने पदार्थ भूतकाल में प्रवेश कर चुके हैं अर्थात् नष्ट हो चुके हैं? इस के आशय
अर्थात् उदर में कितने पदार्थ होंगे? अर्थात् भविष्य में कितने पदार्थ उत्पन्न होंगे. इस ने
अर्थात् परमात्मा ने अपने एक अंश को हजारों रूपों में प्रकट किया है, उस में कितने पदार्थों
ने प्रवेश किया? (९)
यत्र लोकांश्च कोशांश्चापो ब्रह्म जना विदुः.
असच्च यत्र सच्चान्तः स्कम्भं तं ब्रूहि कतमः स्विदेव सः.. (१०)
ज्ञानी लोग जानते है कि जहां लोक और कोष निवास करते हैं तथा जहां जल एवं ब्रह्म
स्थित हैं, सत्य और असत्य दोनों प्रकार के पदार्थ जहां स्थित हैं, उस परमात्मा के विषय में
बताओ कि वह कौन है? (१०)
यत्र तपः पराक्रम्य व्रतं धारयत्युत्तरम्.
ऋतं च यत्र श्रद्धा चापो ब्रह्म समाहिताः स्कम्भं तं ब्रूहि कतमः स्विदेव
सः.. (११)
जिस को आधार बना कर तपस्या का विधान किया जाता है एवं उत्तम वृत्तों का निर्वाह
होता है, जिस में सत्य श्रद्धा जल एवं ब्रह्म व्याप्त हैं, उस परमात्मा के विषय में बताओ कि
वह कौन है? (११)
यस्मिन् भूमिरन्तरिक्षं द्यौर्यस्मिन्नध्याहिता.
यत्राग्निश्चन्द्रमाः सूर्यो वातस्तिष्ठन्त्यार्पिताः स्कम्भं तं ब्रूहि कतमः स्विदेव
सः.. (१२)
जिस के आधार पर भूमि, आकाश और स्वर्ग टिके हुए हैं तथा अग्नि, चंद्रमा, सूर्य और
वायु जिस में अर्पित हो कर स्थित है, उस परमेश्वर के विषय में बताओ कि वह कौन है?
(१२)
यस्य त्रयस्त्रिंशद् देवा अङ्गे सर्वे समाहिताः.
स्कम्भं तं ब्रूहि कतमः स्विदेव सः.. (१३)
जिस के अंग में सभी तैंतीस देव समाए हुए हैं, उस परमेश्वर के विषय में बताओ कि वह
कौन है? (१३)
यत्र ऋषयः प्रथमजा ऋचः साम यजुर्मही.
एकर्षिर्यस्मिन्नार्पितः स्कम्भं तं ब्रूहि कतमः स्विदेव सः.. (१४)
पूर्ववर्ती ऋषि, ऋचाएं, साममंत्र, यजुर्वेद के मंत्र तथा महती ब्रह्मविद्या जिस में स्थित है
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