अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextविष्णोः क्रमो ऽ सि सपत्नहा यज्ञसंशितो ब्रह्मतेजाः.
यज्ञमनु वि क्रमे ऽ हं यज्ञात् तं निर्भजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.
स मा जीवीत् तं प्राणो जहातु.. (३१)
तू विष्णु का तेज एवं शत्रुओं का विनाश करने वाला है. तू यज्ञ में स्थित है एवं ब्रह्म का
तेज है. मैं ब्रह्म में पराक्रम का प्रदर्शन करता हूं तथा ब्रह्म से उसे हटाता हूं. हम जिस से द्वेष
करते हैं अथवा जो हम से द्वेष करता है, उस का विनाश हो. प्राण उस का त्याग कर दें. (३१)
विष्णोः क्रमो ऽ सि सपत्नहौषधीशितः सोमतेजाः.
ओषधीरनु वि क्रमे ऽ हमोषधीभ्यस्तं निर्भजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं
द्विष्मः.
स मा जीवीत् तं प्राणो जहातु.. (३२)
तुम विष्णु के पराक्रम एवं शत्रुओं का विनाश करने वाले हो. तुम ओषधि में आश्रित हो
एवं सोम के तेज हो. मैं ओषधियों में अपने पराक्रम का प्रदर्शन करता हूं तथा ओषधियों से
उसे हटाता हूं. मैं जिस से द्वेष करता हूं अथवा जो हम से द्वेष करता है. उस का विनाश हो.
प्राण उस का त्याग करें. (३२)
विष्णो क्रमो ऽ सि सपत्नहाप्सुसंशितो वरुणतेजाः.
अपो ऽ नु वि क्रमे ऽ हमद्भ्यस्तं निर्भजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं
द्विष्मः.
स मा जीवीत् तं प्राणो जहातु.. (३३)
तुम विष्णु के पराक्रम एवं शत्रुओं का विनाश करने वाले हो. तुम जलों में स्थित एवं
वरुण का तेज हो. मैं जलों में अपने पराक्रम का प्रदर्शन करता हूं तथा जलों से उसे हटाता हूं.
मैं जिस से द्वेष करता हूं अथवा जो मुझ से द्वेष करता है, उस का विनाश हो. प्राण उस का
त्याग करें. (३३)
विष्णोः क्रमो ऽ सि सपत्नहा कृषिसंशितो ऽ न्नतेजाः.
कृषिमनु वि क्रमे ऽ ह कृष्यास्तं निर्भजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.
स मा जीवीत् तं प्राणो जहातु.. (३४)
तुम विष्णु के पराक्रम एवं शत्रु विनाशकर्ता हो. तुम कृषि में स्थित एवं अन्न के तेज हो.
मैं कृषि में अपने पराक्रम का प्रदर्शन करता हूं तथा कृषि से उसे हटाता हूं. हम जिस से द्वेष
करते हैं अथवा जो हम से द्वेष करता है, उस का विनाश हो. प्राण उस का त्याग करें. (३४)
विष्णोः क्रमो ऽ सि सपत्नहा प्राणसंशितः पुरुषतेजाः.
प्राणमनु वि क्रमे ऽ हं प्राणात् तं निर्भजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं
द्विष्मः.
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