Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

Report a copyright issue

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 518 of 1063

Read in context
Page 518

प्रतीचीः कृत्या आकृत्यामून् कृत्याकृतो जहि.. (६)
हमारा पुरोहित पश्चिम देश का रहने वाला एवं हमारे सामने उपस्थित है. पूर्व के
निवासियों ने कृत्या का निर्माण किया है. हे पुरोहित! तुम उस को नष्ट करो. (६)
यस्त्वोवाच परेहीति प्रतिकूलमुदाय्यम्.
तं कृत्ये ऽ भिनिवर्तस्व मा ऽ स्मानिच्छो अनागसः.. (७)
हे कृत्या! जिस ने तुझे आदेश दिया कि दूर जा. उस ने हमारे प्रतिकूल आचरण किया
है. तू उसी के पास लौट जा तथा हम निरपराधों की इच्छा मत कर. (७)
यस्ते परूंषि संदधौ रथस्येवर्भुर्धिया.
तं गच्छ तत्र ते ऽ यनमज्ञातस्ते ऽ यं जनः.. (८)
हे कृत्या! बढ़ई जिस प्रकार रथ के अंगों को जोड़ता है, उसी प्रकार जिस ने बुद्धिमत्ता
के साथ तेरी हड्डियों को जोड़ा है, तू उसी के समीप लौट जा. तेरा गंतव्य वही है. मैं तेरा
अपरिचित हूं. (८)
ये त्वा कृत्वोलेभिरे विद्वला अभिचारिणः.
शंभ्वी ३ दं कृत्यादूषणं प्रतिवर्त्म पुनःसरं तेन त्वा स्नपयामसि.. (९)
हे कृत्या! जिस जादूटोना करने वाले ने तुझे प्राप्त किया है, वह मार्ग को दूषित कर के
तुझे लौटा सकता है. हम उसी के रक्त से तुझे स्नान कराते हैं. (९)
यद् दुर्भगां प्रस्नपितां मृतवत्समुपेयिम.
अपैतु सर्वं मत् पापं द्रविणं मोप तिष्ठतु.. (१०)
हम जिस कृत्या को प्राप्त कर के मृतवत्सा गौ की दशा वाले हो गए हैं. अर्थात् हमारी
पत्नियां मरे हुए बच्चे को जन्म देती हैं. मुझ से संबंधित समस्त पाप दूर हो जाएं तथा मुझे
धन प्राप्त हो. (१०)
यत् ते पितृभ्यो ददतो यज्ञे वा नाम जगृहुः.
संदेश्या ३ त् सर्वस्मात् पापादिमा मुञ्चन्तु त्वौषधीः.. (११)
यज्ञ में पितरों का भाग देते हुए जो नाम लिया गया था, ये जड़ीबूटियां उस नाम लेने के
पाप से तुझे छुड़ाएं. (११)
देवैनसात् पित्र्यान्नामग्राहात् संदेश्या दभिनिष्कृतात्.
मुञ्चन्तु त्वां वीरुधो वीर्येण ब्रह्मण ऋग्भिः पयस ऋषीणाम्.. (१२)
देवों के प्रति किए गए पाप से, पितरों का नाम लेने के पाप से, अपमानित करने से और
ebook converter DEMO Watermarks*