अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextइमं रथमधि ये सप्त तस्थुः सप्तचक्रं सप्त वहन्त्यश्वाः.
सप्त स्वसारो अभि सं नवन्त यत्र गवां निहिता सप्त नामा.. (३)
सूर्य के सात पहियों वाले रथ को सात घोड़े खींचते हैं. सात ऋषि इस रथ के समीप
खड़े रहते हैं. सात बहनें सूर्य की स्तुति करती हैं. किरणों रूपी सात गाएं सूर्य के रथ से
संबंधित हैं, जो इसे रस युक्त बनाती हैं. (३)
को ददर्श प्रथमं जायमानमस्थन्वन्तं यदनस्था बिभर्ति.
भूम्या असुरसृगात्मा क्वस्वित् को विद्वांसमुप गात् प्रष्टुमेतत्.. (४)
सर्वप्रथम उत्पन्न होने वाले अस्थिरहित को किस ने देखा था जो समस्त विश्व को धारण
करता है? भूमि को प्राणवंत करने वाले जल की आत्मा कहां स्थित है? इस बात को पूछने
के लिए विद्वान् के समीप कौन गया था? (४)
इह ब्रवीतु य ईमङ्ग वेदास्य वामस्य निहितं पदं वेः.
शीर्ष्णः क्षीरं दुहते गावो अस्य वव्रिं वसाना उदकं पदा ऽ पुः.. (५)
इन सूर्य के विषय में जो जानता हो, वह बताए कि इन के चरण आकाश में कहां स्थित
हैं? गाएं इन्हीं सूर्य के मंडल में दूध दुहाती हैं तथा वे गाएं इन्हीं सूर्य की किरणों के द्वारा जल
पीती हैं. (५)
पाकः पृच्छामि मनस ऽ विजानन् देवानामेना निहिता पदानि.
वत्से बष्कये ऽ धि सप्त तन्तून् वि तत्निरे कवय ओतवा उ.. (६)
सूर्य के रूप को पूर्ण रूप से न जानता हुआ मैं अपने मन से पूछता हूं कि समस्त देवों
के रक्षासाधन इन सूर्य में ही निहित हैं. विद्वानों ने सूर्य देव के विस्तार के हेतु सात तंतु
स्थापित कर दिए हैं. (६)
अचिकित्वांश्र्चिकितुषश्चिदत्र कवीन् पृच्छामि विद्मनो न विद्वान्.
वि यस्तस्तम्भ षडिमा रजांस्यजस्य रूपे किमपि स्विदेकम्.. (७)
अज्ञानी मैं विद्वानों और ज्ञानियों से पूछता हूं कि जिस ने छः रजोगुणी तत्त्वों को स्तंभित
किया है, वह अजन्मा क्या एक ही है? मैं संदेह में पड़ा हूं. और संदेहरहित जनों से अपना
संदेह निवारण करना चाहता हूं. (७)
माता पितरमृत आ बभाज धीत्यग्रे मनसा सं हि जग्मे.
सा बीभत्सुर्गर्भरसा निविद्धा नमस्वन्त इदुपवाकमीयुः.. (८)
सूर्य के जन्म लेते समय ही उन की माता उन के पिता की सेवा करती है. इस के फल
स्वरूप वह बुद्धि और मन से युक्त हो जाती है एवं गर्भरूपी रस से निबद्ध हो जाती है. हवि
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