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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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समाप्त करती हैं. मैं ने यक्ष्मा रोग के समस्त विषों का निवारण करने वाली ओषधियां भी तुझे
बता दी हैं. (१९)
विसल्पस्य विद्रधस्य वातीकारस्य वालजेः.
यक्ष्माणां सर्वेषां विषं निरवोचमहं त्वत्.. (२०)
मैं तेरे लिए विसल्प (पीड़ा), विद्ध (सूजन), वातीकार एवं वालजि (संधि) नामक समस्त
यक्ष्मा रोगों के विषयों को नष्ट करने वाले मंत्रों का उच्चारण कर चुका हूं. (२०)
पादाभ्यां ते जानुभ्यां श्रोणिभ्यां परि भंससः.
अनूकादर्षणीरुष्णिहाभ्यः शीर्ष्णो रोगमनीनशम्.. (२१)
मैं ने तेरी जंघाओं, पैरों, घुटनों, अनूक, उष्णिहा एवं शीश संबंधी समस्त रोगों का
विनाश कर दिया है. (२१)
सं ते शीर्ष्णः कपालानि हृदयस्य च यो विधुः.
उद्यन्नादित्य रश्मिभिः शीर्ष्णो रोगमनीनशो ऽ ङ्गभेदमशीशमः.. (२२)
तेरे शीश पर