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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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वाली प्रतीत हो. हम वधू के समान तेरा शृंगार करते एवं तुझे सामग्री से भरते हैं. (२४)
प्राच्या दिशः शालाया नमो महिम्ने स्वाहा देवेभ्यः स्वाह्येभ्यः.. (२५)
शाला की पूर्व दिशा को नमस्कार है. स्वाहा के योग्य इन महान देवों के लिए यह आहुति
शुभ हो. (२५)
दक्षिणाया दिशः शालाया नमो महिम्ने स्वाहा देवेभ्यः स्वाह्येभ्यः.. (२६)
शाला की दक्षिण दिशा को नमस्कार है. स्वाहा के योग्य इन महान देवों के लिए यह
आहुति शुभ हो. (२६)
प्रतीच्या दिशः शालाया नमो महिम्ने स्वाहा देवेभ्यः स्वाह्येभ्यः.. (२७)
शाला की पश्चिम दिशा को नमस्कार है. स्वाहा के योग्य इन महान देवों के लिए यह
आहुति शुभ हो. (२७)
उदीच्या दिशः शालाया नमो महिम्ने स्वाहा देवेभ्यः स्वाह्येभ्यः.. (२८)
शाला की उत्तर दिशा को नमस्कार है. स्वाहा के योग्य इन महान देवों के लिए आहुति
शुभ हो. (२८)
ध्रुवाया दिशः शालाया नमो महिम्ने स्वाहा देवेभ्यः स्वाह्येभ्यः.. (२९)
शाला की नीचे की दिशा को नमस्कार है. स्वाहा के योग्य इन महान देवों के लिए यह
आहुति शुभ हो. (२९)
ऊर्ध्वाया दिशः शालाया नमो महिम्ने स्वाहा देवेभ्यः स्वाह्येभ्यः.. (३०)
शाला की ऊपर की दिशा को नमस्कार है. स्वाहा के योग्य इन महान देवों के लिए यह
आहुति शुभ हो. (३०)
दिशोदिशः शालाया नमो महिम्ने स्वाहा देवेभ्यः स्वाह्येभ्यः.. (३१)
शाला की प्रत्येक दिशा को नमस्कार है. स्वाहा के योग्य इन महान देवों के लिए यह
आहुति शुभ हो. (३१)
सूक्त-४ देवता—ऋषभ
साहस्स्रस्त्वेष ऋषभः पयस्वान् विश्वा रूपाणि वक्षणासु बिभ्रत्.
भद्रं दात्रे यजमानाय शिक्षन् बार्हस्पत्य उसियस्तन्तुमातान्.. (१)
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