अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextअसुर उसी माया के उपजीवी हैं. जो इस बात को जानता है, वह सब के उपजीवन के
योग्य है. (४)
सोदक्रामत् सा पितॄनागच्छत् तां पितर उपाह्वयन्त स्वध एहीति.. (५)
वह विराट् उत्क्रमण कर के पितरों के समीप पहुंचा. पितरों ने उस का आह्वान किया—
“हे स्वधा, आओ.” (५)
तस्या यमो राजा वत्स आसीद् रजतपात्रम् पात्रम्.. (६)
राजा यम उस के वत्स हुए तथा चांदी का पात्र उस का पात्र हुआ. (६)
तामन्तको मार्त्यवो ऽ धोक् तां स्वधामेवाधोक्.. (७)
मृत्यु के देवता यमराज ने उस का तथा स्वधा का भी दोहन किया. (७)
तां स्वधां पितर उप जीवन्त्युपजीवनीयो भवति य एवं वेद.. (८)
पितर उस स्वधा के उपजीवी बनते हैं. जो इस बात को जानता है, वह सब के उपजीवन
के योग्य बनता है. (८)
सोदक्रामत् सा मनुष्या ३ नागच्छत् तां मनुष्या ३ उपह्वयन्तेरावत्येहीति..
(९)
वह विराट् उत्क्रमण कर के मनुष्यों के समीप आया. मनुष्यों ने उस का आह्वान करते
हुए कहा, “हे इरावती, यहां आओ.” (९)
तस्या मनुर्वैवस्वतो वत्स आसीत् पृथिवी पात्रम्.. (१०)
वैवस्वत मनु उस के वत्स थे और पृथ्वी उस का पात्र बनी. (१०)
तां पृथी वैन्यो ऽ धोक् तां कृषिं च सस्यं चाधोक्.. (११)
वेन के पुत्र पृथु ने उस पृथ्वी का दोहन करते हुए उस से फसलें और कृषि प्राप्त की.
(११)
ते कृषिं च सस्यं च मनुष्या ३ उप जीवन्ति
कृष्ट्राधिरुपजीवनीयो भवति य एवं वेद.. (१२)
मनुष्य उस कृषि और फसल के सहारे जीवित रहते हैं. जो इस बात को जानता है, वह
कृषि कर्म में कुशल होता है तथा उस के सहारे सब जीवन यापन करते हैं. (१२)
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