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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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राक्षस हैं, मैं ने पीली सरसों रूपी ओषधि के द्वारा इन सभी हिंसकों का विनाश कर दिया है.
(६)
यस्त्वा स्वप्ने निपद्यते भ्राता भूत्वा पितेव च.
बजस्तान्सहतामितः क्लीबरूपांस्तिरीटिनः.. (७)
हे गर्भिणी! जो राक्षस तेरी स्वप्न अवस्था में सहोदर भ्राता एवं पिता के समान विश्वास
उत्पन्न करता हुआ गर्भ नष्ट करने के विचार से तुझ में प्रवेश करता है, मैं सफेद सरसों रूपी
ओषधि के द्वारा इन सब को तथा नपुंसक का रूप बना कर घूमने वाले सभी राक्षसों का
विनाश करता हूं. (७)
यस्त्वा स्वपन्तीं त्सरति यस्त्वा दिप्सति जाग्रतीम्.
छायामिव प्र तान्सूर्यः परिक्रामन्ननीनशत्.. (८)
हे गर्भिणी! जो राक्षस सोते समय तेरे समीप आता है अथवा जो जाग्रत अवस्था में तेरी
हिंसा करना चाहता है, यह सरसों उन सब को उसी प्रकार नष्ट कर दे, जिस प्रकार आकाश में
विचरण करने वाला सूर्य अंधकार का विनाश करता है. (८)
यः कृणोति मृतवत्सामवतोकामिमां स्त्रियम्.
तमोषधे त्वं नाशयास्याः कमलमज्जिवम्.. (९)
जो राक्षस गर्भिणी को मरे हुए पुत्र वाली बनाता है अथवा जो उसे नष्टगर्भ वाली बनाता
है, हे सरसों रूपी ओषधि! तू उस दुष्ट का विनाश कर तथा इस के गर्भ द्वार को स्पष्ट कर.
(९)
ये शालाः परिनृत्यन्ति सायं गर्दभनादिनः.
कुसूला ये च कुक्षिलाः ककुभाः करुमाः स्रिमाः.
तानोषधे त्वं गन्धेन विषूचीनान् वि नाशय.. (१०)
जो पिशाच संध्या के समय गधों के समान शब्द करते हुए घरों के चारों ओर नाचते हैं
तथा जो कुसूल के समान आकृति बना कर नाचते हैं, इन के अतिरिक्त जो बड़े पेट वाले,
अर्जुन वृक्ष के समान भयानक आकृति वाले एवं भांतिभांति के आकारों तथा ध्वनियां करने
वाले राक्षस घरों के चारों ओर नाचते हैं, हे सरसों रूपी ओषधि! तू अपनी गंध से उन सभी
विप्लवकारियों को समाप्त कर. (१०)
ये कुकुन्धाः कुकूरभाः कृत्तीर्दूशानि बिभ्रति.
क्लीबा इव प्रनृत्यन्तो वने ये कुर्वते घोषं तानितो नाशयामसि.. (११)
मुरगे के समान ध्वनि करने वाले जो ककुंध नामक पिशाच हैं तथा जो दूषित कर्म
धारण करते हैं, जो पिशाच हिजड़ों और पागलों के समान नृत्य करते हैं तथा जो वन में हल्ला
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