अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextमैं ऐसा उपाय करता हूं, जिस से बुढ़ापा और मृत्यु तुझे न छू सकें. मैं तेरी आयु का विस्तार
कर के तेरा कल्याण करता हूं तथा यमराज के द्वारा भेजे हुए एवं सभी जगह घूमते हुए
यमदूतों को तुझ से दूर करता हूं. (११)
आरादरातिं निर्ऋतिं परो ग्राहिं क्रव्यादः पिशाचान्.
रक्षो यत् सर्वं दुर्भूतं तत् तम इवाप हन्मसि.. (१२)
शत्रु बनी हुई एवं आगे आ कर पकड़ने वाले पाप देवता निर्ऋति का मैं समीप से हनन
करता हूं तथा मांसाहारी पिशाचों का विनाश करता हूं. इस प्रकार दुष्टता को प्राप्त जो संपूर्ण
राक्षस जाति है तथा जो अंधकार के समान दूसरों को ढकने वाले हैं, उन का मैं विनाश करता
हूं. (१२)
अग्नेष्टे प्राणममृतादायुष्मतो वन्वे जातवेदसः.
यथा न रिष्या अमृतः सजूरसस्तत् ते कृणोमि तदु ते समृध्यताम्.. (१३)
हे पाप देवता निर्ऋति के द्वारा प्राणरहित बनाए गए पुरुष! चिरजीवी एवं मरणरहित
देव अग्नि से मैं तेरे प्राणों की याचना करता हूं. वह अग्नि देव सभी जन्म लेने वालों को
जानते हैं. हे पुरुष! जिस प्रकार तू न मरे और मरणरहित हो कर प्रसन्न बने, मैं तेरे लिए उसी
प्रकार का शांतिकर्म करता हूं. तुझ से संबंधित यह शांतिकर्म समृद्ध हो. (१३)
शिवे ते स्तां द्यावापृथिवी असंतापे अभिश्रियौ.
शं ते सूर्य आ तपतु शं वातो वातु ते हृदे.
शिवा अभि क्षरन्तु त्वापो दिव्याः पयस्वतीः.. (१४)
हे कुमार! तेरे घर से निकलने के समय द्यावा पृथ्वी मंगल करने वाली हों, संताप न
पहुंचाएं तथा तुझे धन प्रदान करें. सूर्य तेरे लिए सुखकारक तपें तथा वायु तेरे मन के अनुकूल
बन कर एवं सुखकारी हो कर चले. दिव्य जल तेरे लिए अनेक प्रकार के स्वादों से युक्त एवं
कल्याणकारी हो कर बरसें. (१४)
शिवास्ते सन्त्वोषधय उत् त्वाहार्षमधरस्या उत्तरां पृथिवीमभि.
तत्र त्वादित्यौ रक्षतां सूर्याचन्द्रमसावुभा.. (१५)
हे कुमार! तेरे भोजन के उपयोग में आने वाले गेहूं आदि अन्न सुखकारी हों. पृथ्वी के
निचले भाग की अपेक्षा तेरे निमित्त ऊंची पृथ्वी का उद्धार किया गया है. पृथ्वी के उच्च भाग
में अदिति के पुत्र सूर्य और चंद्रमा दोनों तेरी रक्षा करें. (१५)
यत् ते वासः परिधानं यां नीविं कृणुषे त्वम्.
शिवं ते तन्वे ३ तत् कृण्मः संस्पर्शेऽदृक्ष्णमस्तु ते.. (१६)
हे बालक! जो वस्त्र तेरे ऊपरी भाग को ढक रहा है और जिसे तूने कमर के नीचे पहना
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