अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextवर्षा करे. सूर्य देव तेरे शरीर को सुख देने के लिए तपें. हे पुरुष! मृत्यु देव तुझ पर दया करें.
(५)
उद्यानं ते पुरुष नावयानं जीवातुं ते दक्षतातं कृणोमि.
आ हि रोहेमममृतं सुखं रथमथ जिर्विर्विदथमा वदासि.. (६)
हे पुरुष! मैं तेरे जीवन के लिए ओषधियों का निर्माण करता हूं तथा तुझे बल प्रदान
करता हूं. मृत्यु के पाशों से तेरा छुटकारा हो, तू उन पाशों में न फंसे. तू समाप्त न होने वाले
तथा इंद्रिय सुख के अनुकूल शरीर रूपी रथ पर बैठ. इस शरीर रूपी रथ पर बैठ कर तू कह
कि मुझे चेतना प्राप्त हो गई है. (६)
मा ते मनस्तत्र गान्मा तिरो भून्मा जीवेभ्यः प्र मदो मानु गाः पितॄन्.
विश्वे देवा अभि रक्षन्तु त्वेह.. (७)
तेरा मन यमराज के विषय में न जाए तथा तेरा मन विलीन भी न हो. तू अपने बंधुओं के
प्रति असावधान न रहे. तू मरे हुए पूर्वजों का अनुगमन मत कर. इंद्र आदि देव इसी शरीर में
तेरा पालन करें. (७)
मा गतानामा दीधीथा ये नयन्ति परावतम्.
आ रोह तमसो ज्योतिरेह्या ते हस्तौ रभामहे.. (८)
तू पितृलोक में गए हुओं के मार्ग का ध्यान मत कर तथा मृत पूर्वजों के लिए मत रो. मरे
हुए लोग तुझे भी यहां से दूर देश में ले जाएंगे. तू अंधकार को त्याग कर प्रकाश में स्थित हो.
हम अंधकार से प्रकाश में ले जाने के लिए तेरे हाथ पकड़ते हैं. (८)
श्यामश्च त्वा मा शबलश्च प्रेषितौ यमस्य यौ पथिरक्षी श्वानौ.
अर्वाङेहि मा वि दीध्यो मात्र तिष्ठः पराङ्मनाः.. (९)
हे मरने के समीप पहुंचे हुए पुरुष! यमराज के मार्ग के रक्षक दो कुत्ते हैं— एक काला
और दूसरा चितकबरा. वे दोनों तुझे बाधा न पहुंचाएं. कुत्तों के काटने से बच कर तू हमारी
ओर आ. तू मृत पुरुषों का ध्यान मत कर तथा इसी भूलोक में निवास करता हुआ एक बार
भी वहां से विमुख मत हो. (१)
मैतं पन्थामनु गा भीम एष येन पूर्वं नेयथ थं ब्रवीमि.
तम एतत् पुरुष मा प्र पत्था भयं परस्तादभयं ते अर्वाक्.. (१०)
हे प्राणहीन पुरुष! तू मरे हुए लोगों के मार्ग पर गमन मत कर. वह मार्ग भयानक है. मैं
तुझे उस मार्ग के विषय में बताता हूं, जिस मार्ग से लोग मृत्यु से पूर्व नहीं जाते हैं. तू इस
मृत्युरूपी अंधकार में प्रवेश मत कर, क्योंकि यमराज की नगरी में प्रवेश करने पर भय प्रतीत
होता है. हमारी ओर आने में तुझे अभय मिलेगा. (१०)
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