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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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Page 412

(१)
सूक्त-१०६ देवता—बुरे स्वप्न का विनाश
यत् स्वप्ने अन्नमश्नामि न प्रातरधिगम्यते.
सर्वं तदस्तु मे शिवं नहि तद् दृश्यते दिवा.. (१)
स्वप्न देखते समय मैं जो अन्न खाता हूं, वह अन्न प्रातःकाल दिखाई नहीं देता. वह अन्न
दिन में भी नहीं दिखाई देता. स्वप्न में खाया गया समस्त भोजन मेरे लिए कल्याण करने वाला
हो. (१)
सूक्त-१०७ देवता—द्यावा, पृथिवी आदि
नमस्कृत्य द्यावापृथिवीभ्यामन्तरिक्षाय मृत्यवे.
मेक्षाम्यूर्ध्वस्तिष्ठन् मा मा हिंसिषुरीश्वरा:.. (१)
मैं धरती, आकाश, अंतरिक्ष और मृत्यु को नमस्कार कर के बैठा हूं. मैं ऊर्ध्व लोक को न
जाऊं अर्थात् मृत्यु को प्राप्त न करूं. द्यावा, पृथ्वी आदि के अधिष्ठाता देव मेरी हिंसा न करें.
(१)
सूक्त-१०८ देवता—आत्मा
को अस्या नो द्रुहो ऽ वद्यवत्या उन्नेष्यति क्षत्रियो वस्य इच्छन्.
को यज्ञकाम: क उ पूर्तिकाम: को देवेषु वनुते दीर्घमायु:.. (१)
हमें निवास स्थान देने का इच्छुक कौन क्षत्रिय राजा इस समय बाधा पहुंचाने वाली एवं
अहितकारिणी पिशाची से हमारा उद्धार करेगा? हमारे द्वारा किए जाते हुए यज्ञ की कामना
करता हुआ एवं हमें धन की आपूर्ति की इच्छा करता हुआ कौन सा देव देवों के मध्य
चिरकाल तक होने वाले जीवन को प्राप्त करता है. (१)
सूक्त-१०९ देवता—आत्मा
क: पृश्निं धेनुं वरुणेन दत्त मथर्वणे सुदुघां नित्यवत्साम्.
बृहस्पतिना सख्यं जुषाणो यथावशं तन्व: कल्पयाति.. (१)
लाल आदि रंगों वाली, सरलता से दुही जाने वाली, सर्वदा बछड़े देने वाली एवं अथर्वा
ऋषि के लिए वरुण द्वारा दी गई गाय को बृहस्पति देव के साथ मित्रता का भाव रखता हुआ
कौन सा देव इच्छानुसार कल्पित कर सकता है. आशय यह है कि केवल बृहस्पति देव ही
ऐसा कर सकते हैं. (१)
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