अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 401 of 1063
Read in contextहे अमावस्या! तुम्हारे महत्त्व के कारण निवास करते हुए फल की कामना करने वाले
लोग तुम्हें हवि देते हैं. हमें वह फल प्राप्त हो और हम धनों के स्वामी बनें. पूर्ण चंद्र से युक्त
पौर्णमासी पश्चिम दिशा में विजयी होती है तथा पूर्व दिशा में विजय प्राप्त करती है. (१)
अहमेवास्यमावास्या ३ मामा वसन्ति सुकृतो मयीमे.
मयि देवा उभये साध्याश्चेन्द्रज्येष्ठाः समगच्छन्त सर्वे.. (२)
मैं ही अमावस्या संबंधी देव हूं. शोभन कर्मों वाले देवयज्ञ योग्यता के कारण मुझ में
निवास करते हैं. साध्य और सिद्ध नामक दोनों प्रकार के इंद्र आदि देव मुझ से मिलते हैं. (२)
आगन् रात्री संगमनी वसूनामूर्जं पुष्टं वस्वावेशयन्ती.
अमावास्यायै हविषा विधेमोर्जं दुहाना पयसा न आगन्.. (३)
अमावस्या की रात्रि हमें धन प्रदान करने के निमित्त आए. वह हमें अन्न का रस, पोषण
और धन देती हुई आए. (३)
अमावास्ये न त्वदेतान्यन्यो विश्वा रूपाणि परिभूर्जजान.
यत्कामास्ते जुहुमस्तन्नो अस्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम्.. (४)
हे अमावस्या! तेरे अतिरिक्त कोई भी देव इस समय वर्तमान समस्त साकार प्राणियों में
व्याप्त होने वाला नहीं है. हम जिस फल की कामना करते हुए तुम्हें हवि देते हैं, हमें वह फल
प्राप्त हो और हम धनों के स्वामी बनें. (४)
सूक्त-८५ देवता—पौर्णमासी प्रजापति
पूर्णा पश्चादुत पूर्णा पुरस्तादुन्मध्यतः पौर्णमासी जिगाय.
तस्यां देवैः संवसन्तो महित्वा नाकस्य पृष्ठे समिषा मदेम.. (१)
पूर्ण चंद्र से युक्त पौर्णमासी पश्चिम दिशा में विजयी होती है तथा पूर्व दिशा में विजय
प्राप्त करती है. यह आकाश के मध्य में भी सर्वोत्कृष्ट सिद्ध होती है. हम इस पौर्णमासी में
यज्ञ करने योग्य देवों के साथ महत्त्व से निवास करते हुए, स्वर्ग के ऊपरी भाग में अन्न के
साथ प्रसन्न हों. (१)
वृषभं वाजिनं वयं पौर्णमासं यजामहे.
स नो ददात्वक्षितां रयिमनुपदस्वतीम्.. (२)
हम अभिलषित फल देने वाले तथा अन्न धन से युक्त पौर्णमास पर्व का यज्ञ करते हैं.
पौर्णमास यज्ञ हमें विनाश रहित, शत्रुओं की बाधा से रहित एवं उपभोग करने पर भी क्षीण न
होने वाला धन दे. (२)
ebook converter DEMO Watermarks*