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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 375 of 1063

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Page 375

उप प्रियं पनिप्रतं युवानमाहुतीवृधम्.
अगन्म बिभ्रतो नमो दीर्घमायुः कृणोतु मे.. (१)
सब को प्रसन्न करने वाले, स्तुति किए जाते हुए, नित्य तरुण एवं घृत की आहुतियों से
बढ़ने वाले अग्नि देव को हम नमस्कार एवं हविरूप अन्न ले कर मिलें. वे मेरी और मेरे
विद्यार्थी की आयु १०० वर्ष करें. (१)
सूक्त-३४ देवता—पूषा
सं मा सिञ्चन्तु मरुतः सं पूषा सं बृहस्पतिः.
सं मायमग्निः सिञ्चतु प्रजया च धनेन च दीर्घमायुः कृणोतु मे.. (१)
मरुत् आदि देवगण मुझ फल चाहने वाले यजमान को पुत्र आदि रूप प्रजा से और धन
से युक्त करें. अग्नि मेरे विद्यार्थी की आयु लंबी करें. (१)
सूक्त-३५ देवता—जातवेद
अग्ने जातान् प्र णुदा मे सपत्नान् प्रत्यजाताञ्जातवेदो नुदस्व.
अधस्पदं कृणुष्व ये पृतन्यवोऽनागसस्ते वयमदितये स्याम.. (१)
हे अग्नि! मेरे उत्पन्न शत्रुओं को मुझ से बहुत दूर जाने की प्रेरणा दो. हे जातवेद अग्नि!
मेरे जो शत्रु उत्पन्न नहीं हुए हैं, उन का विनाश करो. जो शत्रु सेना ले कर मुझ से युद्ध करने
के इच्छुक हैं. उन्हें अपने पैरों के नीचे कुचल दो. हे खंड न करने योग्य पृथ्वी अथवा अदीना
देवमाता! हम पापरहित हो कर तुम्हारे कृपा पात्र बनें. (१)
सूक्त-३६ देवता—जातवेद
प्रान्यान्त्सपत्नान्त्सहसा सहस्व प्रत्यजाताञ्जातवेदो नुदस्व.
इदं राष्ट्रं पिपृहि सौभगाय विश्व एनमनु मदन्तु देवाः.. (१)
हे अग्नि! मेरे उत्पन्न शत्रुओं को बहुत दूर भगा दो. हे उत्त्पन्नों को जानने वाले अग्नि देव!
मेरे ऐसे शत्रुओं का विनाश करो, जिन्हें मैं नहीं जानता. हमारे इस राष्ट्र को तुम सौभाग्य से
पूर्ण करो. सभी देव शत्रु विनाश का प्रयोग करने वाले इस यजमान को प्रसन्न करें. (१)
इमा यास्ते शतं हिराः सहस्रं धमनीरुत.
तासां ते सर्वासामहमश्मना बिलमप्यधाम्.. (२)
हे मुझ से विद्वेष करने वाली स्त्री! तेरी जो गर्भधारण संबंधी सौ से अधिक नाड़ियां हैं
तथा हजार धमनियां हैं, मैं उन सब का मुख पत्थर से ढक कर तुझे बांझ बनाता हूं. (२)