अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextउखाड़ता हूं. मैं विद्रधि को, हृदय रोग को तथा अज्ञात स्वरूप वाले यक्ष्मा रोग को भी नीचे
की ओर विमुख करता हूं. (३)
सूक्त-१२८ देवता—शकधूम, सोम
शकधूमं नक्षत्राणि यद् राजानमकुर्वत.
भद्राहमस्मै प्रायच्छन्निदं राष्ट्रमसादिति.. (१)
प्राचीन काल में शकधूम नाम के ब्राह्मण को तारों ने चंद्रमा के समान राजा बनाया. मुझ
भद्रा ने इस शकधूम ब्राह्मण को प्राचीन काल में कल्याणकारी समय इसलिए दिया था कि
उसे नक्षत्र मंडल का स्वामित्व प्राप्त हो. (१)
भद्राहं नो मध्यन्दिने भद्राहं सायमस्तु नः.
भद्राहं नो अह्नां प्राता रात्री भद्राहमस्तु नः.. (२)
हमारे लिए दोपहर और सायंकाल पुण्यकारक हों. इस के अतिरिक्त प्रातःकाल और
पूरी रात्रि भी हमारे लिए शुभ हो. (२)
अहोरात्राभ्यां नक्षत्रेभ्यः सूर्याचन्द्रमसाभ्याम्.
भद्राहमस्मभ्यं राजञ्छकधूम त्वं कृधि.. (३)
हे शकधूम ब्राह्मण तथा हे नक्षत्रों के राजा चंद्रमा! रातदिन, नक्षत्रों, सूर्य और चंद्रमा के
पास हमारे लिए पुण्य वाला दिन लाओ. (३)
यो नो भद्राहमकरः सायं नक्तमथो दिवा.
तस्मै ते नक्षत्रराज शकधूम सदा नमः.. (४)
हे शकधूम ब्राह्मण और हे तारों के स्वामी चंद्रमा! तुम ने जो सायंकाल में, रात में और
दिन में हमारा कल्याण किया, उसे तुम्हारे लिए नमस्कार है. (४)
सूक्त-१२९ देवता—भग
भगेन मा शांशपेन साकमिन्द्रेण मेदिना. कृणोमि भगिनं माप
द्रान्त्वरातयः.. (१)
मैं गाय एवं भैंस के खुरों की आकृति वाले देव के द्वारा अपनेआप को सौभाग्यशाली
बनाता हूं. मैं अपनी सेवा से संतुष्ट इंद्र के द्वारा अपने को सौभाग्यशाली बनाता हूं. हमारे शत्रु
हमारे समीप से दूर चले जाएं और बुरी दशा को प्राप्त हों. (१)
येन वृक्षाँ अभ्यभवो भगेन वर्चसा सह.
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