Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 321 of 1063

Read in context
Page 321

अग्नि! हम हवि के द्वारा तुम्हारी सेवा करते हैं. (३)
सूक्त-८१ देवता—आदित्य
यन्ता ऽ सि यच्छसे हस्तावेप रक्षांसि सेधसि.
प्रजां धनं च गृह्णानः परिहस्तो अभूदयम्.. (१)
हे अग्नि! तुम गर्भ को नष्ट करने वाले राक्षस आदि को वश में करने में समर्थ हो,
इसीलिए अपने दोनों हाथ फैलाओ तथा उन के द्वारा गर्भ का नाश करने वाले राक्षसों का
विनाश करो. पुत्र आदि रूप प्रजा और उन के भोग के लिए धन प्रदान करते हुए अग्नि अपने
हाथ फैला कर रक्षा करें. (१)
परिहस्त वि धारय योनिं गर्भाय धातवे.
मय्यिदि पुत्रमा धेहि तं त्वमा गमयागमे.. (२)
हे कंकण! तुम गर्भ धारण करने के लिए गर्भाशय को विस्तृत करो. हे पत्नी! तुम अपने
गर्भाशय में पुत्र को धारण करो तथा पति के आगमन पर मेरे मनचाहे पुत्र को जन्म दो. (२)
यं परिहस्तमबिभरदितिः पुत्रकाम्या.
त्वष्टा तमस्या आ बध्नाद् यथा पुत्रं जनादिति.. (३)
पुत्र की इच्छा से देवता अदिति ने जिस कंकण को धारण किया, वही कंकण त्वष्टा देव
मेरी इस पत्नी के हाथ में बांधें, जिस से यह पुत्र को जन्म दे सके. (३)
सूक्त-८२ देवता—इंद्र
आगच्छत आगतस्य नाम गृह्णाम्यायत:.
इन्द्रस्य वृत्रघ्नो वन्वे वासवस्य शतक्रतो:.. (१)
मैं अपने समीप आए हुए इंद्र को प्रसन्न करने वाले नाम वृत्र हंता का उच्चारण करता हूं.
विवाह की इच्छा वाला मैं वृत्र का वध करने वाले, वसुओं द्वारा उपासना किए गए और शक्ति
की प्रसिद्धि करने वाले सौ कर्मों के स्वामी इंद्र की उपासना अभिमत फल को पाने के लिए
करता हूं. (१)
येन सूर्या सावित्रीमश्विनोहतुः पथा.
तेन मामब्रवीद् भगो जायामा वहतादिति.. (२)
जिस प्रकार अश्विनीकुमारो ने सविता की पुत्री सूर्या से विवाह किया, उसी प्रकार से भग
ने मुझ से कहा कि पत्नी ले आओ. (२)
eBook converter DEMO Watermarks*