Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 306 of 1063

Read in context
Page 306

सरलता से प्राप्त होने वाले धनों में स्थापित करें. हे ऋतुओं के अभिमानी देवो! तुम हमें गायों
एवं पुत्र, पौत्र आदि से युक्त करो. हम तुम्हारे ऐसे घर में रहें, जहां सभी दुःखों के कारणों का
अभाव हो. (२)
इदावत्सराय परिवत्सराय संवत्सराय कृणुता बृहन्नमः.
तेषां वयं सुमतौ यज्ञियानामपि भद्रे सौमनसे स्याम.. (३)
हे मनुष्यो! इदावत्सर, परिवत्सर और संवत्सर को बारबार नमस्कार कर के प्रसन्न करो.
हम यज्ञ के योग्य इदावत्सर आदि के अधिष्ठाता देवों की अनुग्रह बुद्धि में हों तथा उन की
कृपा का फल प्राप्त करें. (३)
सूक्त-५६ देवता—विश्वे देव, रुद्र
मा नो देवा अहिवर्धीत् सतोकान्त्सहपूरुषान्.
संयतं न वि ष्वरद् व्यात्तं न सं यमन्नमो देवजनेभ्यः.. (१)
हे विष को शांत करने वाले देवो! सांप हमें और हमारे पुत्र, पौत्र आदि की एवं सेवकों
की हिंसा न करे. हमें काटने के लिए सांप का मुंह न खुले. उस का खुला हुआ मुख मंत्र शक्ति
के कारण बंद न हो. सर्प विष शांत करने में समर्थ देवों को नमस्कार है. (१)
नमो ऽ स्वसिताय नमस्तिरश्चिराजये.
स्वजाय बभ्रवे नमो नमो देवजनेभ्यः.. (२)
असित, तिरश्चिराजी, बबेरू और स्वज नामक सर्पों को नमस्कार है. सर्प के विष को
शमन करने में समर्थ देवों को नमस्कार है. (२)
सं ते हन्मि दता दतः समु ते हन्वा हनू.
सं ते जिह्वया जिह्वां सम्वास्नाह आस्यम्.. (३)
हे सांप! मैं तेरे ऊपर वाले और नीचे वाले दांतों को मिलाता हूं. मैं तेरी कौड़ी के ऊपर
और नीचे वाले भागों को भी मिलाता हूं. मैं तेरी एक जीभ से दूसरी जीभ को मिलाता हूं. मैं
तेरे मुख के ऊपर और नीचे वाले भागों को भी मिलाता हूं. (३)
सूक्त-५७ देवता—रुद्र, भेषज
इदमद् वा उ भेषजमिदं रुद्रस्य भेषजम्.
येनेषुमेकतेजनां शतशल्यामपब्रवत्.. (१)
यही रोग की ओषधि है और यही अंतकाल में सब को रुलाने वाले रुद्र की ओषधि है.
इस एक गांठ वाली ओषधि का प्रयोग सौ कांटों वाले बांस के रूप में लक्ष्य को समीप जान
ebook converter DEMO Watermarks*