अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextन करे. (३)
सूक्त-२८ देवता—यम
ऋचा कपोतं नुदत प्रणोदमिषं मदन्तः परि गां नयामः.
संलोभयन्तो दुरिता पदानि हित्वा न ऊर्जं प्र पदात् पथिष्ठः.. (१)
हे देवो! इस मंत्र के द्वारा कबूतर को हमारे घर से दूर जाने के लिए प्रेरित करो. हम अन्न
को पा कर तृप्त होते हुए धरती पर गायों को सभी ओर चराएं. हम कबूतर के पंजों के चिह्नों
को भली प्रकार धोएं और वह कबूतर हमारी पाकशाला के अन्न को त्याग कर पक्षियों में श्रेष्ठ
हो तथा उड़ जाए. (१)
परीमे ३ ग्निमर्षत परीमे गामनेषत.
देवेष्वक्रत श्रवः क इमां आ दधर्षति.. (२)
हे ऋत्विज्! लोग कबूतर के प्रवेश के दोष की शांति के लिए अग्नि को मेरे घर में ले
आए हैं और घर में गाय को सभी ओर घुमा रहे हैं. इन्होंने अग्नि आदि देवों को हवि रूप में
अर्पित किया है. अब हमारे पुरुषों को कौन पराजित कर सकता है. (२)
यः प्रथमः प्रवतमाससाद बहुभ्यः पन्थामनुपस्पशानः.
यो ३ स्येशे द्विपदो यश्चतुष्पदस्तस्मै यमाय नमो अस्तु मृत्यवे.. (३)
यह आज मरने योग्य है, यह कल मरने योग्य है, इस प्रकार की गणना करते हुए देवों में
मुख्य यमराज ने उत्तम मार्ग प्राप्त किया है. वे यम इस यजमान के दो पैरों वाले मनुष्यों और
चार पैरों वाले पशुओं के स्वामी हैं. मृत्यु को प्रेरित करने वाले उन यम को नमस्कार है. (३)
सूक्त-२९ देवता—यम
अमून् हेतिः पतत्रिणी न्येकतु यदुलूको वदति मोघमेतत्.
यद् वा कपोतः पदमग्नौ कृणोति.. (१)
यह पंखों वाला आयुध हमारे दूरस्थ शत्रुओं के पास जाए. यह उल्लू जो कहता है, वह
असत्य हो. कबूतर ने अशुभ की सूचना के लिए जो हमारे चूल्हे की अग्नि के समीप पंजे का
चिह्न बनाया है, वह भी प्रभावहीन हो जाए. (१)
यौ ते दूतौ निर्ऋत इदमतो ऽ प्रहितौ प्रहितौ वा गृहं नः.
कपोतोल्लूकाभ्यामपदं तदस्तु.. (२)
हे पाप देवता निर्ऋति! तेरे द्वारा भेजे हुए जो कबूतर और उल्लू हैं. वे मेरे घर में आ कर
भी आश्रय न पा सकें. (२)
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