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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 260 of 1063

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Page 260

हे सिनीवाली एवं सरस्वती! मेरे गर्भ को पुष्ट बनाओ. फूलों की माला धारण करने वाले
अश्विनीकुमार मेरे गर्भ की रक्षा करें. (३)
गर्भं ते मित्रावरुणौ गर्भं देवो बृहस्पतिः.
गर्भं त इन्द्रश्चाग्निश्च गर्भं धाता दधातु ते.. (४)
मित्र, वरुण, बृहस्पति देव, इंद्र, अग्नि और धाता देव तेरे गर्भ को पुष्ट करें. (४)
विष्णुर्योनिं कल्पयतु त्वष्टा रूपाणि पिंशतु.
आ सिञ्चतु प्रजापतिर्धाता गर्भं दधातु ते.. (५)
विष्णु तेरी योनि की कल्पना करें, त्वष्टा तेरे रूप की रचना करें, प्रजापति तेरा सिंचन
करें और धाता तेरे गर्भ को पुष्ट करें. (५)
यद् वेद राजा वरुणो यद् वा देवी सरस्वती.
यदिन्द्रो वृत्रहा वेद तद् गर्भकरणं पिब.. (६)
राजा वरुण, देवी सरस्वती एवं वृत्र नाशक इंद्र जिस गर्भपोषक वस्तु को जानते हैं, उसे
तू पी ले. (६)
गर्भो अस्योषधीनां गर्भो वनस्पतीनाम्.
गर्भो विश्वस्य भूतस्य सो अग्ने गर्भमेह धाः.. (७)
हे अग्नि! तुम ओषधियों के, वनस्पतियों के तथा सभी प्राणियों के गर्भ हो. अतएव तुम
मेरे गर्भ को पुष्ट करो. (७)
अधि स्कन्द वीरयस्व गर्भमा धेहि योन्याम्.
वृषासि वृष्णयावन् प्रजायै त्वा नयामसि.. (८)
हे वृषणों अथवा अंडकोषों वाले! तू वर्षण अर्थात् सेचन करता है. तू योनि में गर्भ
स्थापित कर. तू ऊपर हो कर चलता हुआ वीरता का प्रदर्शन कर. हम तुझे प्रजा के निमित्त
ग्रहण करते हैं. (८)
वि जिहीष्व बार्हत्सामे गर्भस्ते योनिमा शयाम्.
अदुष्टे देवाः पुत्रं सोमपा उभयाविनम्.. (९)
हे सांत्वनामयी साध्वी! तू विशेष गति वाली हो. मैं तुझ में गर्भाधान करता हूं. सोमपान
करने वाले देवों ने इस लोक में और परलोक में रक्षा करने वाला पुत्र प्रदान किया है. (९)
धातः श्रेष्ठेन रूपेणास्या नार्या गवीन्योः.
पुमांसं पुत्रमा धेहि दशमे मासि सूतवे.. (१०)
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