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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 259 of 1063

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Page 259

पितरः परे ते मावन्तु.
अस्मिन् ब्रह्मण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां
प्रतिष्ठायामस्यां चित्त्यामस्यामाकूत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा..
(१५)
सात पीढ़ियों के ऊपर के पितर इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, संकल्प में प्रतिष्ठा में,
देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (१५)
तता अवरे ते मावन्तु.
अस्मिन् ब्रह्मण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां
प्रतिष्ठायामस्यां चित्त्यामस्यामाकूत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा..
(१६)
सपिंड पितर इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, संकल्प में, प्रतिष्ठा में, देवाह्वान कर्म में
तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (१६)
ततस्ततामहास्ते मावन्तु.
अस्मिन् ब्रह्मण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां
प्रतिष्ठायामस्यां चित्त्यामस्यामाकूत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा..
(१७)
पितरों के पितामह मेरे इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में, देवाह्वान
कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (१७)
सूक्त-२५ देवता—योनि
पर्वताद् दिवो योनेरङ्गादङ्गात् समाभृतम्.
शेपो गर्भस्य रेतोधाः सरौ पर्वमिवा दधत्.. (१)
पर्वत की ओषधि, स्वर्ग के पुण्य और अंगों की शक्ति से पुष्ट वीर्य धारण करने वाला
पुरुष जल में पत्ते के समान गर्भाधान करता है. (१)
यथेयं पृथिवी मही भूतानां गर्भमादधे.
एवा दधामि ते गर्भं तस्मै त्वामवसे हुवे.. (२)
जिस प्रकार विशाल पृथ्वी सभी भूतों अर्थात् प्राणियों का गर्भ धारण करती हैं, उसी
प्रकार मैं तेरा गर्भ धारण करती हूं और उस की रक्षा के निमित्त तुझे बुलाती हूं. (२)
गर्भं धेहि सिनीवालि गर्भं धेहि सरस्वती.
गर्भं ते अश्विनोभा धत्तां पुष्करस्रजा.. (३)
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