अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 251 of 1063
Read in contextशब्द करती है. घी से चुपड़ी हुई तू शत्रुओं को भय उत्पन्न करने वाला शब्द कर. (३)
यथा मृगाः संविजन्त आरण्याः पुरुषादधि.
एवा त्वं दुन्दुभे ऽ मित्रानभि क्रन्द प्र त्रासयाथो चित्तानि मोहय.. (४)
हे दुंदुभि! वनचारी शिकारी पुरुष से जिस प्रकार वन के पशु भयभीत होते हैं, उसी
प्रकार तू अपने गर्जन से शत्रुओं को भयभीत करती हुई, उन के चित्तों को मोहित बना. (४)
यथा वृकादजावयो धावन्ति बहु बिभ्यतीः.
एवा त्वं दुन्दुभे ऽ मित्रानभि क्रन्द प्र त्रासयाथो चित्तानि मोहय.. (५)
जिस प्रकार भेड़ें और बकरियां भेड़िए के कारण अधिक भयभीत हो कर भागती हैं,
उसी प्रकार तू गड़गड़ाहट करती हुई शत्रुओं को भयभीत कर के उन का चित्त मोहित कर.
(५)
यथा श्येनात् पतत्रिणः संविजन्ते अहर्दिवि सिंहस्य स्तनथोर्यथा.
एवा त्वं दुन्दुभे ऽ मित्रानभि क्रन्द प्र त्रासयाथो चित्तानि मोहय.. (६)
हे दुंदुभि! जिस प्रकार बाज से सभी पक्षी और सिंह से सभी प्राणी भयभीत रहते हैं,
उसी प्रकार तू शत्रुओं के प्रति गड़गड़ाहट कर के उन्हें भयभीत कर के उन के चित्तों को
मोहित कर. (६)
परामित्रान् दुन्दुभिना हरिणस्याजिनेन च.
सर्वे देवा अतित्रसन् ये संग्रामस्येशते.. (७)
जो संग्राम के देवता हैं, उन्होंने हिरण के चमड़े से मढ़ी हुई दुंदुभि बजा कर शत्रुओं को
भयभीत कर के पराजित किया. (७)
यैरिन्द्रः प्रक्रीडते पद्घोषैश्छायया सह.
तैरमित्रास्त्रसन्तु नो ऽ मी ये यन्त्यनीकशः.. (८)
इंद्र जिन पदघोषों से खेलते हैं, उन से अधिक संख्या वाले शत्रु भयभीत हों. (८)
ज्याघोषा दुन्दुभयो ऽ भि क्रोशन्तु या दिशः.
सेना पराजिता यतीरमित्राणामनीकशः.. (९)
शत्रुओं की पराजित सेनाएं जिस ओर भाग रही हैं, हमारे बाणों की डोरी और दुंदुभि का
शब्द मिल कर उधर ही उन को भयभीत करें और हरा दें. (९)
आदित्य चक्षुरा दत्स्व मरीचयो ऽ नु धावत.
पत्सङ्गिनीरा सजन्तु विगते बाहुवीर्ये.. (१०)
ebook converter DEMO Watermarks*