Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 245 of 1063

Read in context
Page 245

(८)
तीक्ष्णेषवो ब्राह्मणा हेतिमन्तो यामस्यन्ति शरव्यां ३ न सा मृषा.
अनुहाय तपसा मन्युना चोत दूरादव भिन्दन्त्येनम्.. (९)
ब्राह्मण अपने तप और क्रोध रूप बाणों को जिस की ओर फेंकता है, वे बेकार नहीं
जाते. वे बाण दूर से ही शत्रु को वेध देते हैं. (९)
ये सहस्रमराज्ञानासन् दशशता उत.
ते ब्राह्मणस्य गां जग्ध्वा वैतहव्याः पराभवन्.. (१०)
वीरहव्य के वशंज हजारों राजा पृथ्‍वी पर राज्य करते थे. ब्राह्मण की गाय का अपहरण
करने के कारण वे पराभव को प्राप्त हुए. (१०)
गौरैव तान् हन्यमाना वैतहव्याँ अवातिरत्.
ये केसरप्राबन्धायाश्चरमाजामपेचिरन्.. (११)
वीरहव्य के वशंज जिन राजाओं ने केशर प्राबंधा नाम की चरम अजा का मांस पकाया
था, उन राजाओं की मार खाते हुए गाय ने ही उन्हें छिन्नभिन्न कर दिया था. (११)
एकशतं ता जनता या भूमिर्व्यधूनुत.
प्रजां हिंसित्वा ब्राह्मणीमसंभव्यं पराभवन्.. (१२)
जो सैकड़ों लोग अपने चलने से धरती को कंपित कर देते थे, वे ब्राह्मण की संतान की
हिंसा करने के कारण ही पराजित हुए. (१२)
देवपीयुश्चरति मर्त्येषु गरगीर्णो भवत्यस्थिभूयान्.
यो ब्राह्मणं देवबन्धुं हिनस्ति न स पितृयाणमप्येति लोकम्.. (१३)
जो देवबंधु ब्राह्मण की हिंसा करता है, वह देवशस्त्र मनुष्यों के मध्य विष खाने वाले के
समान चलता फिरता है और अस्थि मात्र रह जाता है. वह पितृयान द्वारा मिलने वाले लोक
को प्राप्त नहीं करता. (१३)
अग्निर्वे नः पदवायः सोमो दायाद उच्यते.
हन्ताभिशस्तेन्द्रस्तथा तद् वेधसो विदुः.. (१४)
अग्नि हमें हमारे पदों तक पहुंचाता है और सोम हमारा दायाद कहा जाता है. इंद्र हमारी
ओर से मारने वाले एवं घायल करने वाले हैं. (१४)
इषुरिव दिग्धा नृपते पृदाकूरिव गोपते.
सा ब्राह्मणस्येषुर्धोरा तया विध्यति पीयतः.. (१५)
ebook converter DEMO Watermarks*