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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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Page 239

हे ऋतु के अनुसार उत्पन्न ओषधि! मेरी निंदा करने वाले आठ और अस्सी अर्थात
अट्ठासी हों, पर तू मेरी वाणी को मधुर बना, क्योंकि तू मधुर है. (८)
नव च मे नवतिश्च मे ऽ पवक्तार ओषधे.
ऋतजात ऋतावरि मधु मे मधुला कर:.. (९)
हे ऋतु के अनुसार उत्पन्न ओषधि! मेरी निंदा करने वाले चाहे नौ और नब्बे अर्थात्
निन्यानवे हों, पर तू मेरी वाणी को मधुर बना, क्योंकि तू मधुर है. (९)
दश च मे शतं च मे ऽ पवक्तार ओषधे.
ऋतजात ऋतावरि मधु मे मधुला कर:.. (१०)
हे ऋतु के अनुसार उत्पन्न ओषधि! मेरी निंदा करने वाले चाहे दस और सौ अर्थात एक
सौ दस हों, परंतु तू मेरी वाणी को मधुर बना, क्योंकि तू मधुर है. (१०)
शतं च मे सहस्रं चापवक्तार ओषधे.
ऋतजात ऋतावरि मधु मे मधुला कर:.. (११)
हे ऋतु के अनुसार उत्पन्न ओषधि! मेरी निंदा करने वाले चाहे सौ और हजार अर्थात्
ग्यारह सौ हों, पर तू मेरी वाणी को मधुर बना, क्योंकि तू मधुर है. (११)
सूक्त-१६ देवता—एक वृष
यद्येकवृषो ऽ सि सृजारसो ऽ सि.. (१)
हे लवण! यदि तू एक वृषभ अर्थात् बैल के समान शक्ति वाला है तो इस गाय से संतान
उत्पन्न कर, अन्यथा तू प्रभावहीन समझा जाएगा. (१)
यदि द्विवृषो ऽ सि सृजारसो ऽ सि.. (२)
हे लवण! यदि तू दो बैलों के समान शक्तिशाली है तो इस गाय को संतान वाली बना,
अन्यथा तू शक्तिहीन समझा जाएगा. (२)
यदि त्रिवृषो ऽ सि सृजारसो ऽ सि.. (३)
हे लवण! यदि तू तीन बैलों के समान शक्ति वाला है तो इस गाय से संतान उत्पन्न कर,
अन्यथा तू प्रभावहीन समझा जाएगा. (३)
यदि चतुर्वृषो ऽ सि सृजारसो ऽ सि.. (४)
हे लवण! यदि तू चार बैलों के समान शक्ति वाला है तो इस गाय को संतान वाली बना,
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