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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 215 of 1063

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Page 215

पृथ्वी! मैं अथर्ववेद का ज्ञाता ब्राह्मण हूं और तुम्हारे लिए अन्न भेंट करता हूं. (५)
सप्त मर्यादाः कवयस्ततक्षुस्तासामिदेकामभ्यं हुरो गात्.
आयोर्ह स्कम्भ उपमस्य नीडे पथां विसर्गे धरुणेषु तस्थौ.. (६)
मनु आदि ऋषियों ने चोरी, गुरुपत्नीगमन, ब्रह्महत्या, भ्रूणहत्या, मद्यपान, मिथ्याभाषण
एवं पापकर्म — इन सात कर्मों के रूप में धार्मिक, मर्यादा निश्चित की है. जो इस मर्यादा को
नहीं मानता, वह पापी है. इन सात मर्यादाओं का पालन करने वाला पुरुष मृत्यु के पश्चात सूर्य
मंडल में स्थित आदित्य को प्राप्त करता है और प्रलय काल तक वहीं स्थित रहता है. (६)
उतामृतासुर्व्रत एमि कृण्वन्नसुरात्मा तन्व १ स्तत् समुद्गुः.
उत वा शक्रो रत्नं दधात्यूर्जया वा यत् सचते हविर्दाः.. (७)
शरीर से संबंधित जो स्वयं प्रकाश उभरता है, मैं उसी का व्रती हूं. मैं अपने बल के सहारे
आ रहा हूं. जो व्यक्ति इंद्र को शक्ति वाला हवि देता है, इंद्र उसे रत्न आदि धन प्रदान करते हैं.
(७)
उत पुत्रः पितरं क्षत्रमीडे ज्येष्ठं मर्यादमह्वयन्त्स्वस्तये.
दर्शन् नु ता वरुण यास्ते विष्ठा आवर्व्रततः कुणवो वपूंषि.. (८)
क्षत्रिय जाति का पुत्र अपने पिता की पूजा करे तथा उत्तम कल्याण पाने के लिए धर्म
पालन में प्रवृत्त हो. हे वरुण! अनेक स्थानों को दिखाते हुए तुम सांसारिक जीवों की रचना
करते हो. (८)
अर्धमर्धेन पयसा पृणक्ष्यर्धेन शुष्म वर्धसे अमुर.
अविं वृधाम शग्मियं सखायं वरुणं पुत्रमदित्या इषिरम्.
कविशस्तान्यस्मै वपूंष्यवोचाम रोदसी सत्यवाचा.. (९)
मित्र और वरुण अदिति के पुत्र हैं. हम इन दोनों की वृद्धि करते हैं. हे वरुण! तुम आधे
दूध, घृत आदि से इस सेना का बल बढ़ाते हो और आधे से अपनी वृद्धि करते हो. हे आकाश
और पृथ्वी के देवो! विद्वान् ऋषियों ने जिन शरीरों का वर्णन किया है, हम अपनी सत्य वाणी
से उन्हीं का वर्णन करते हैं. (९)
सूक्त-२ देवता—वरुण
तदिदास भुवनेषु ज्येष्ठं यतो जज्ञ उग्रस्त्वेष्णृम्णः.
सद्यो जज्ञानो नि रिणाति शत्रूननु यदेनं मदन्ति विश्व ऊमाः.. (१)
इंद्र संसार में धनवान एवं बली होने के कारण श्रेष्ठ माने जाते हैं. इंद्र ने जन्म लेते ही
शत्रु का संहार करना आरंभ कर दिया था, इसीलिए इन के सैनिक इन की रक्षा करते हैं एवं
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