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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 208 of 1063

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Page 208

उद्भिन्दतीं सञ्जयन्तीमप्सरां साधुदेविनीम्.
ग्लहे कृतानि कृण्वानामप्सरां तामिह हुवे.. (१)
बाजी लगा कर धन का भेदन करती हुई एवं भलीभांति जुए में जीतने वाली एवं अक्ष
शलाका आदि से अच्छी तरह जुआ खेलने वाली अप्सरा की मैं स्तुति करता हूं. सदैव दांव पर
लगाए गए धन पर जुआ जीतने के चिह्न बनाने वाली उस अप्सरा को मैं यहां बुलाता हूं. (१)
विचिन्वतीमाकिरन्तीमप्सरां साधुदेविनीम्.
ग्लहे कृतानि गृह्णानामप्सरां तामिह हुवे.. (२)
एक निश्चित काठ पर तीनचार अक्षों अर्थात् पासों को एक करती हुई, पुनः उन्हें ही जुए
में जीतने के लिए बहुत से काठों पर बिखेरती हुई एवं जय के उपाय जानने के कारण
भलीभांति जुआ खेलती हुई अप्सरा को मैं अपने समीप बुलाता हूं. वह जुए में लगाए गए धन
को चिह्न बना कर जीत लेती है. (२)
यायैः परिनृत्यत्याददाना कृतं ग्लहात्.
सा नः कृतानि सीषती प्रहामाप्नोतु मायया.
सा नः पयस्वत्यैतु मा नो जैषुरिदं धनम्.. (३)
जो अप्सरा जुए में जीते गए धन को 'यह मेरा है' कह कर अधिकार में कर लेती हैं तथा
पासों की संख्याओं के द्वारा जुए में जीत कर प्रसन्नतापूर्वक नृत्य करती हैं, वे हमारे कृतों में
अर्थात् चार संख्या के दांवों को सोखती हुई पासों को अपनी माया से प्राप्त कर के गाय आदि
धन वाली अप्सराएं हमारे समीप आएं. जुए के दांव पर लगा हमारा धन दूसरे न जीत सकें.
(३)
या अक्षेषु प्रमोदन्ते शुचं क्रोधं च बिभ्रती.
आनन्दिनीं प्रमोदिनीमप्सरां तामिह हुवे.. (४)
जो अप्सरा जुए में जीतने के कारण प्रसन्नता एवं हार के कारण शोक और क्रोध को
धारण करती है, जुए के कारण हर्षित होने वाली तथा ज्वारियों को प्रसन्नता देने वाली उस
अप्सरा को मैं बुलाता हूं. (४)
सूर्यस्य रश्मीननु याः सञ्चरन्ति मरीचीर्वा या अनुसञ्चरन्ति.
यासामृषभो दूरतो वाजिनीवान्त्सद्यः सर्वान् लोकान् पर्येति रक्षन्.
स न ऐतु होममिमं जुषाणो ३ न्तरिक्षेण सह वाजिनीवान्.. (५)
जो अप्सराएं सूर्य की किरणों के पीछे घूमती हैं अथवा सूर्य की किरणें उन के पीछे
चलती हैं, उन अप्सराओं के गर्भाधान में समर्थ पति सदा उषाओं से संबंधित रहते हैं. वे सभी
लोकों की रक्षा करने के लिए प्रतिदिन आते हैं. उषा के पति सूर्य अप्सराओं के साथ हमारे
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