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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 206 of 1063

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Page 206

हे जड़ीबूटियो! प्राचीन काल में तुम्हें साधन बना कर अथर्ववेद संबंधी महर्षियों ने
राक्षसों को मारा था. तुम्हारे द्वारा कश्यप, कण्व और अगस्त्य ऋषियों ने राक्षसों का वध
किया. (१)
त्वया वयमप्सरसो गन्धर्वाञ्चातयामहे.
अजशृङ्गयज रक्षः सर्वान् गन्धेन नाशय.. (२)
हे अजशृंगी नाम की जड़ी! तुझे साधन बना कर हम उपद्रव करने वाली अप्सराओं और
गंधर्वों का नाश करते हैं. तू राक्षसों को यहां से दूर भगा तथा अपनी गंध से सभी राक्षसों का
विनाश कर. (२)
नदीं यन्त्वप्सरसो ऽ पां तारमवश्वसम्.
गुल्गुलूः पीला नलद्यौ ३ क्षगन्धिः प्रमन्दनी.
तत् परेताप्सरसः प्रतिबुद्धा अभूतन.. (३)
गंधर्वों की पत्नियां अप्सराएं अपने वास स्थान पर उसी प्रकार चली जाएं, जिस प्रकार
नदी पार करने वाले मल्लाह के समीप पहुंचते हैं. हे अप्सराओ! गुग्गुलु, पीला, नलवी,
ओक्षगंधि एवं प्रमंदिनी के हवन से भयभीत हो कर अपने निवास स्थान को चली जाओ तथा
वहीं रहो. (३)
यत्राश्वत्था न्यग्रोधा महावृक्षाः शिखण्डिनः.
तत् परेताप्सरसः प्रतिबुद्धा अभूतन.. (४)
जहां अश्वत्थ, न्यग्रोध आदि महावृक्ष एवं मोर होते हैं, हे अप्सराओ! वहां से अपने
निवास स्थान को चली जाओ तथा वहीं रुकी रहो. (४)
यत्र वः प्रेङ्खा हरिता अर्जुना उत यत्राघाटाः कर्कर्यः संवदन्ति.
तत् परेताप्सरसः प्रतिबुद्धा अभूतनः.. (५)
हे अप्सराओ! तुम्हारे खेलने के लिए जहां झूले पड़े हैं, उन झूलों का रंग हरा और सफेद
है. जहां कर्करी नाम के बाजे बजाए जाते हैं, वहां से भाग कर अपने निवास स्थान को चली
जाओ तथा वहीं रहो. (५)
एयमगन्नोषधीनां वीरुधां वीर्यावती.
अजशृङ्गयराट्की तीक्ष्णशृङ्गी वृषतु.. (६)
जड़ीबूटियों एवं वृक्षों में सब से अधिक शक्ति वाली अजशृंगी, अराटकी तथा तीक्ष्ण
शृंगी नाम की जड़ीबूटियां आ गई हैं. इस स्थान से राक्षस भाग जाएं. (६)
आनृत्यतः शिखण्डिनो गन्धर्वस्याप्सरापतेः. भिनद्मि मुष्कावपि यामि
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