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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 186 of 1063

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Page 186

(३)
अस्मै द्यावापृथिवी भूरि वामं दुहाथां घर्मदुघे इव धेनू.
अयं राजा प्रिय इन्द्रस्य भूयात् प्रियो गवामोषधीनां पशूनाम्.. (४)
हे द्यावा और पृथ्वी! मेरे इस राजा के लिए धर्मदुघा गौ के समान अधिक मात्रा में धन
प्रदान करो. यह राजा इंद्र का अत्यधिक प्रिय हो जाए तथा उस के कारण मैं गायों,
जड़ीबूटियों और पशुओं का प्रिय बनूं. (४)
युनज्मि त उत्तरावन्तमिन्द्रं येन जयन्ति न पराजयन्ते.
यस्त्वा करदेकवृषं जनानामुत राज्ञामुत्तमं मानवानाम्.. (५)
हे राजन्! मैं अतिशय उत्कर्ष वाले इंद्र को तुम्हारा मित्र बनाता हूं. उन इंद्र की प्रेरणा से
तुम्हारे योद्धा विजयी होंगे, कभी पराजित नहीं होंगे. जिस इंद्र ने तुम्हें अन्य मनुष्यों के मध्य
गायों में सांड के समान उत्तम बनाया है, उसी ने तुम्हें मनुष्यों और राजाओं में श्रेष्ठ बनाया है.
(५)
उत्तरस्त्वमधरे ते सपत्ना ये के च राजन् प्रतिशत्रवस्ते.
एकवृष इन्द्रसखा जिगीवाञ्छत्रूयतामा भरा भोजनानि.. (६)
हे राजन्! तुम श्रेष्ठ बनो तथा तुम्हारे विरोधी निम्नतम बनें. वे विरोधी तुम्हारे प्रति शत्रुता
का भाव रखते हैं. तुम सर्व प्रमुख एवं इंद्र के मित्र बन कर सभी पर विजय प्राप्त करो. जो
तुम्हारे शत्रुओं के समान आचरण करते हैं, तुम उन के भोगसाधन धनों को छीन लो. (६)
सिंहप्रतीको विशो अद्धि सर्वा व्याघ्रप्रतीको ऽ व बाधस्व शत्रून्.
एकवृष इन्द्रसखा जिगीवाञ्छत्रूयतामा खिदा भोजनानि.. (७)
हे राजन्! तुम सिंह के समान पराक्रमी बन कर सभी प्रजाओं पर शासन करो तथा बाघ
के समान आक्रमणकारी बन कर सभी शत्रुओं को बाधा पहुंचाओ. तुम सर्व प्रमुख एवं इंद्र के
मित्र बन कर सभी पर विजय प्राप्त करो. जो तुम्हारे शत्रुओं के समान आचरण करते हैं, तुम
उन के भोग साधन धनों को छीन लो. (७)
सूक्त-२३ देवता—अग्नि
अग्नेर्मन्वे प्रथमस्य प्रचेतसः पाञ्चजन्यस्य बहुधा यमिन्धते.
विशोविशः प्रविशिवांसमीमहे स नो मुञ्चत्वंहसः.. (१)
मैं मुख्य विशेष ज्ञानी एवं देवयज्ञ, पितृयज्ञ, सूतयज्ञ, मनुष्ययज्ञ और बृह्तयज्ञ नामक
पांच यज्ञ करने वाले अग्नि देव का महत्त्व जानता हूं. उन्हें अनेक प्रकार से प्रज्वलित किया
जाता है. सभी प्रजाओं में जठराग्नि के रूप में प्रवेश करने वाले अग्नि देव से मैं याचना करता
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