Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 185 of 1063

Read in context
Page 185

गाएं दिखाई देती हैं, वे ही इंद्र हैं. इस हेतु मैं गायों के दूध, घी आदि हवि के द्वारा हृदय और
ज्ञान से इंद्र का यज्ञ करना चाहता हूं. (५)
यूयं गावो मेदयथा कृशं चिदश्रीरं चित् कृणुथा सुप्रतीकम्.
भद्रं गृहं कृणुथ भद्रवाचो बृहद् वो वय उच्यते सभासु.. (६)
हे गायो! तुम अपने दूध, घी आदि से दुर्बल मनुष्य को भी मोटाताजा बनाओ तथा
अशोभन अंग वाले को शोभन अवयवों वाला बनाओ. हे कल्याणी वाणी वाली गाय! हमारे
घर को अलंकृत बनाओ. तुम्हारे दूध, दही, घी आदि से बना भोजन सभाओं में अधिक प्रशंसा
पाता है. (६)
प्रजावतीः सूयवसे रुशन्तीः शुद्धा अपः सुप्रपाणे पिबन्तीः.
मा व स्तेन ईशत माघशंसः परि वो रुद्रस्य हेतिर्वृणक्तु .. (७)
हे गाय! तुम उत्तम घास वाली भूमि में चलती हुई स्वच्छ जल पियो और उत्तम संतान
वाली बनो. चोर तुम्हें न चुरा सके. बाघ आदि दुष्ट पशु तुम्हारी हिंसा न करें. रुद्र का आयुध
तुम्हारा स्पर्श न करे. (७)
सूक्त-२२ देवता—इंद्र, क्षत्रिय राजा
इममिन्द्र वर्धय क्षत्रियं म इमं विशामेकवृषं कृणु त्वम्.
निरमित्रानक्ष्णुह्यस्य सर्वांस्तान् रन्धयास्मा अहमुत्तरेषु.. (१)
हे इंद्र! मेरे इस क्षत्रिय राजा को पुत्र, पौत्र, वाहन आदि से समृद्ध बनाओ. इस राजा को
तुम वीर्य वालों में प्रमुख बनाओ. जो इस के शत्रु राजा हैं, उन सब को तुम प्राण हीन कर दो.
तुम सभी को इस के वश में करो. मैं भी इसे अपने मंत्रों के सामर्थ्य से इंद्र आदि लोकपालों में
से एक बनाता हूं. (१)
एमं भज ग्रामे अश्वेषु गोषु निष्टं भज यो अमित्रो अस्य.
वर्ष्म क्षत्राणामयमस्तु राजेन्द्र शत्रुं रन्धय सर्वमस्मै.. (२)
हे इंद्र! इस राजा को जनसमूह से, घोड़ों से और गायों से संयुक्त करो, इस का जो शत्रु
है, उसे जन समूह आदि से अलग करो. यह राजा अन्य क्षत्रियों के शीश पर वर्तमान हो
अर्थात् सर्वश्रेष्ठ क्षत्रिय बने. इस के सभी शत्रुओं को तुम इस के वश में करो. (२)
अयमस्तु धनपतिर्धनानामयं विशां विशपतिरस्तु राजा.
अस्मिन्निन्द्र महि वर्चांसि धेह्यवर्चसं कृणुहि शत्रुमस्य.. (३)
हे इंद्र! यह राजा धनपतियों में उत्तम धनपति तथा प्रजातियों में उत्तम प्रजापालक हो.
इस राजा में महान तेज और वीर्य धारण करो तथा इस राजा के शत्रुओं को तेजहीन बनाओ.
ebook converter DEMO Watermarks*