अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 166 of 1063
Read in contextयो अग्रतो रोचनानां समुद्रादधि जज्ञिषे.
शङ्खेन हत्वा रक्षांस्यत्रिणो वि षहामहे.. (२)
हे शंख! तू प्रकाशित होने वाले नक्षत्रों के आगे वर्तमान होता है तथा सागर के ऊपर
वाले भाग पर जन्म लेता है. हम तेरे द्वारा राक्षसों और पिशाचों को पराजित करते हैं. (२)
शङ्खेनामीवाममतिं शङ्खेन्रोत सदान्वा:.
शङ्खो नो विश्वभेषज: कृशन: पात्वंहस:.. (३)
हम मणि के रूप में प्राप्त शंख से रोग और सभी अनर्थों के मूल अज्ञान के साथसाथ
दरिद्रता को भी पराजित करते हैं. सभी उपद्रवों का विनाशक और स्वर्ण से उत्पन्न शंख पाप
से हमारी रक्षा करे. (३)
दिवि जातः समुद्रजः सिन्धुतस्पर्याभृतः.
स नो हिरण्यजा: शङ्ख आयुष्यतरणो मणि:.. (४)
शंख पहले स्वर्गलोक में और उस के बाद समुद्र में उत्पन्न हुआ. नदी के उद्गम स्थान से
लाया हुआ तथा स्वर्ण निर्मित शंख और शंख से निर्मित मणि हमारी आयु वृद्धि करने वाली
हो. (४)
समुद्राज्जातो मणिवृ॑त्राज्जातो दिवाकर:.
सो अस्मान्त्सर्वतः पातु हेत्या देवासुरेभ्य:.. (५)
समुद्र अथवा आकाश से उत्पन्न मणि शंख का उपादान है अर्थात् मणि से ही शंख का
निर्माण होता है. यह मणि निर्मित शंख बादलों से बाहर निकले सूर्य के समान चमकता है.
शंख से निर्मित यह मणि हमें देवों और असुरों के भय से बचाए. (५)
हिरण्यानामेको ऽ सि सोमात् त्वमधि जज्ञिषे.
रथे त्वमसि दर्शत इषधौ रोचनस्त्वं प्र ण आयूंषि तारिषत्.. (६)
हे शंख! तू स्वर्ण, रजत आदि भास्वर द्रव्यों में प्रमुख है, क्योंकि तू अमृतमय चंद्रमंडल
से उत्पन्न हुआ है. युद्धों में तू रथों पर दिखाई देने योग्य है. तरकश में भरा हुआ तू दीप्त
दिखाई देता है. इस प्रकार का शंख अथवा शंख से निर्मित मणि हमारी आयु को बढ़ाए. (६)
देवानामस्थि कृशनं बभूव तदात्मन्वच्चरत्यप्स्व १ न्तः.
तत् ते बध्नाम्यायुषे वर्च॑से बलाय दीर्घायुत्वाय
शतशारदाय कार्शनस्त्वाभि रक्षतु.. (७)
इंद्र आदि देवों का जो रक्षक था, वह स्वर्ण शंख का कारण हुआ अर्थात् स्वर्ण से शंख
का निर्माण हुआ. वह स्वर्ण शंख के रूप में शरीर धारण कर के जलों के भीतर विद्यमान
ebook converter DEMO Watermarks*