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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 147 of 1063

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Page 147

बाघ आदि के द्वारा हिंसा करती हुई विनाश करती है. (१)
एषा पशून्त्सं क्षिणाति क्रव्याद् भूत्वा व्यद्वरी.
उतैनां ब्रह्मणे दद्यात् तथा स्योना शिवा स्यात्.. (२)
दो बच्चों को एक साथ जन्म देने वाली यह गाय मांस खाने वाली एवं दुःख देने वाली के
समान यजमान के अन्य पशुओं का विनाश करती है. यह टोनेटोटके के समान संताप देने
वाली है. इसे ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए. ऐसा करने से यह अपनी संतान के द्वारा
यजमान के लिए कल्याणकारिणी बन जाती है. (२)
शिवा भव पुरुषेभ्यो गोभ्यो अश्वेभ्यः शिवा.
शिवास्मै सर्वस्मै क्षेत्राय शिवा न इहैधि.. (३)
हे जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली गाय! तू मनुष्यों, गायों और घोड़ों के लिए
कल्याणकारिणी बन. तू इस देश में हमें सब प्रकार से सुखदायी हो. (३)
इह पुष्टिरिह रस इह सहस्रसातमा भव.
पशून् यमिनि पोषय.. (४)
मेरे यजमान के इस घर में गाय आदि धन पुष्ट हों तथा दूध, दही आदि रस समृद्ध हों. हे
जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली गाय! तू इस यजमान के पशुओं का पोषण कर और इसे
हजारों प्रकार के धन प्रदान कर. (४)
यत्रा सुहार्दः सुकृतो मदन्ति विहाय रोगं तन्व १ः स्वायाः.
तं लोकं यमिन्यभिसंबभूव सा नो मा हिंसीत् पुरुषान् पशूंश्च.. (५)
जिस लोक में शोभन हृदय वाले तथा उत्तम कर्म करने वाले पुरुष प्रसन्न होते हैं तथा
ज्वर आदि रोगों का त्याग कर के उन के शरीर पुष्ट होते हैं, वहाँ यदि जुड़वां बच्चों को जन्म
देने वाली गाय सामने आ जाए तो वह हमारे मनुष्यों और पशुओं की हिंसा न करे. (५)
यत्रा सुहार्दां सुकृतामग्निहोत्रहुतां यत्र लोकः.
तं लोकं यमिन्यभिसंबभूव सा नो मा हिंसीत् पुरुषान् पशूंश्च.. (६)
जिस लोक में शोभन हृदय, शोभन ज्ञान और शोभन कर्म वाले अपने शरीर से ज्वर
आदि रोगों का त्याग कर के प्रसन्न होते हैं, वहां जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली गाय आ गई
है. वह हमारे पुरुषों और पशुओं की हिंसा न करे. (६)
सूक्त-२९ देवता—अवि, काम, भूमि
यद् राजानो विभजन्ति इष्टापूर्तस्य षोडशं यमस्यामी सभासदः.
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