Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 114 of 1063

Read in context
Page 114

के उच्च सिंहासन पर विराजमान हों. उस के पश्चात आप शत्रुओं से अपराजित रहते हुए हम
सेवकों को यथायोग्य धन प्रदान करें. (२)
अच्छ त्वा यन्तु हविनः सजाता अग्निर्दूतो अजिरः सं चरातै.
जायाः पुत्राः सुमनसो भवन्तु बहुं बलिं प्रति पश्यासा उग्रः.. (३)
हे राजन्! आप के सजातीय अन्य राजा आप के बुलाने पर आएं. आप का दूत अग्नि
के समान निर्बाध हो कर सर्वत्र विचरण करे. आप की पत्नियां तथा पुत्र आप की पुनः राज्य
प्राप्ति से प्रसन्न हों. आप पर्याप्त शक्तिशाली बन कर अनेक प्रकार के उपायन अर्थात् भेंट में
आई हुई वस्तुएं अपने सामने आई देखें. (३)
अश्विना त्वाग्रे मित्रावरुणोभा विश्वे देवा मरुत्स्त्वा ह्वयन्तु.
अधा मनो वसुदेयाय कृणुष्व ततो न उग्रो वि भजा वसूनि.. (४)
हे राजन्! अश्विनीकुमार, दोनों मित्र-वरुण, विश्वे देव एवं मरुत् आप को राज्य में प्रवेश
करने के लिए बुलाएं. आप अपना मन, धन दान करने में लगाएं. इस के पश्चात आप शत्रुओं
से अपराजित रहते हुए हम सेवकों को यथायोग्य धन प्रदान करें. (४)
आ प्र द्रव परमस्याः परावतः शिवे ते द्यावापृथिवी उभे स्ताम्.
तदयं राजा वरुणास्तथाह स त्वायम ह्वत् स उपेदमेहि.. (५)
हे दूरदेश में स्थित राजन्! दूर देश से अपने राज्य में शीघ्र आइए. अपने राज्य में प्रवेश
के समय धरती और आकाश दोनों आप के लिए मंगलकारी बनें. वरुण आप को बुला रहे हैं.
आप अपने राष्ट्र में आओ. (५)
इन्द्रेन्द्र मनुष्या ३: परेहि सं ह्यज्ञास्था वरुणैः संविदानः.
स त्वायमह्वत् स्वे सधस्थे स देवान् यक्षत् स उ कल्पयाद् विशः.. (६)
हे परम ऐश्वर्य संपन्न इंद्र! हम मनुष्यों के समीप आओ. हे राजन्! वरुण के साथ एकमत
हो कर इंद्र आप को बुला रहे हैं, इसलिए आप अपने राज्य में प्रवेश करें एवं वहां रह कर इंद्र
आदि देवों के निमित्त यज्ञ करें तथा प्रजाओं को अपनेअपने काम में लगाएं. (६)
पथ्या रेवतीर्बहुधा विरूपाः सर्वाः सङ्गत्य वरीयस्ते अक्रन्.
तास्त्वा सर्वाः संविदाना ह्वयन्तु दशमीमुग्रः समुना वशेह.. (७)
धनवती एवं मार्ग में हितकारिणी देवियां आप का कल्याण करें. हे राजन्! अनेक रूपों
वाली जल देवियां एकत्र हो कर आप के लिए श्रेयस्कर बनें एवं एकमत हो कर आप को आप
के राष्ट्र में बुलाएं. वहां आप सशक्त और प्रसन्न रह कर सौ वर्ष का जीवन भोगें. (७)
ebook converter DEMO Watermarks*