अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी
Anuragsagar Vani
by स्वामी मधु परमहंस जी
Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)
Devanagarihipublished144 pages
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अनुरागसागर वाणी
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निह अछर है सार, अछर ते लिखि पावई ॥
धर्मनि करो विचार, निह अछर निह तत्व है ॥
साहिब धर्मदास को सार तत्व के विषय में समझाते हुए कह रहे हैं कि वो निःअक्षर है, अक्षर की सीमा से परे है, अक्षर तो लिखा जा सकता है, इसलिए हे धर्मदास! जो सार तत्व है, वो निःअक्षर है, निःतत्व है।
शब्द शब्द सब कोई कहे, वह तो शब्द विदेह।
जिभया पर आवे नहीं, निरख परख के लेह ॥