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अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी

Anuragsagar Vani

by स्वामी मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished144 pages

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अनुरागसागर वाणी

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आपकी सेवा करूँगा, इसलिए दुखी मत होवो। जो भी हमारा भक्त होगा, वो जो-2 पुण्य आदि कर्म(यज्ञ, कीर्तन, दान आदि)करेगा, सो तुम्हारे परिवार के द्वारा ही। यानी ब्राह्मणों द्वारा ही सब लोग शुभ कर्म करवाते हैं।

ब्रह्मा भये आनंद, जबहि विष्णु अस भासेऊ ॥

मेटेउ चित कर द्वंद, सखा मोर सब सुखी भौ ॥

यह सुन ब्रह्मा बहुत प्रसन्न हुए, उनके चित्त का क्लेश समाप्त हुआ, क्योंकि वे जान गये कि अब मेरी संतान सुखी हो जायेगी, छल-कपट करके भी सुख से रहेगी।

चलो चलो सब कोउ कहै, मोहि अंदेशा और।
साहिब से परिचय नहीं, जायेंगे किस ठौर॥