अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी
Anuragsagar Vani
by स्वामी मधु परमहंस जी
Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)
Devanagarihipublished144 pages
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सतगुरु-वंदना
प्रथम बंदों सतगुरु चरण, जिन अगम गम्य लखाइया ।
ज्ञान दीप प्रकाश करि, पट खोल दरश दिखाइया ॥
जिहि कारणे सिध्या पचे, सो गुरु कृपा ते पाइया ।
अकह मूरति अमिय सूरति, ताहि जाय समाइया ॥
पहले उन गुरु के चरण-कमलों की वंदना करो, जिन्होंने उस साहिब के दुर्गम घर में सहजता से पहुँचाकर उसका दर्शन करवा दिया। उन्होंने ज्ञान रूपी दीपक का प्रकाश करके अज्ञान के पर्दे हटा दिये और उस साहिब का दर्शन करवा दिया। जिस साहिब को खोजते-2 बड़े-2 सिद्ध मर गये, उन साहिब को गुरु की कृपा से पा उस अमृत में समा गया।
सद्गुरु दीन दयाल जी, तुम लग मेरी दौड़।
जैसे काग जहाज़ पर, सूझत कतहुँ न ठौर॥
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