अनुरागसागर वाणी
Anuragsagar Vani
by स्वामी मधु परमहंस जी
Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)
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प्रथम तुम मुहि दीन भुलावा । अब तुम कहो न दरस दिखावा ॥
तासु दरस न पैहो पूता । ऐसी बात कहो अजगूता ॥
ब्रह्मा ने कहा कि मैं नहीं मानूँगा, मुझे बताओ कि वो कहाँ है, क्योंकि पहले भी तुमने कहा कि नहीं है, फिर कहती हो कि दिखाई नहीं देता।
शक्ति ने कहा
कहे जननी सुनो ब्रह्मा, कहों तोसों सत्त ही ॥
सात स्वर्ग हैं माथ ताको, चरण पताल सप्त ही ॥
शक्ति ने कहा—हे ब्रह्मा! मैं तुमसे सच कहती हूँ, सात स्वर्ग तक उसका मस्तक है और सात पाताल तक उसके चरण हैं।
लेहु पुष्प तुम हाथ, जो इच्छा तिहि दरश की ।
जाय नवओ माथ, ब्रह्मा चलै शिर नाइ कै ॥
माता ने उसे फूल देते हुए कहा कि यदि तुम्हें पिता दर्शन की इच्छा है तो यह फूल लो और जाकर माथा टेकना और फूल चढ़ाना। तब ब्रह्मा फूल लेकर आकाश में पिता की खोज में चला।