श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात
Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)
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Read in context३४४ आनन्दरामायणे [ सर्गः ९
आनन्दरामायणमध्यसंस्थं श्रीजन्मकाण्डं तनयप्रदं च ।
पारायणं संश्रवणं तथा वा करोति यो ना स लभेत्सुपुत्रम् ॥१४४॥
इति श्रीमच्छतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये जन्मकाण्डे
कुशलवादीनां जन्मकथनयतवंशविस्तारो नाम नवमः सर्गः ॥ ९ ॥
जन्मकाण्डे सर्गा आनन्दरामायणे नवैव ज्ञातव्याः । चतुरुत्तराष्टशतश्लोका विष्णुदासरूपरामदासामुखोपदिष्टाः ॥१॥
उपवनदर्शनम् ॥ १ ॥ उपवनक्रीडा ॥ २ ॥ सीतातत्यागः ॥ ३ ॥ कुशलवोत्पत्तिः ॥ ४ ॥ रामरक्षा ॥ ५ ॥
कमलहरणम् ॥ ६ ॥ पुत्रभ्यां संग्रामः ॥ ७ ॥ सीताग्रहणम् ॥ ८ ॥ बालकानामुपनयनम् ॥ ९ ॥
मतलब यह कि जन्मकाण्डका पाठ करनेसे पुत्रार्थी पुत्र, धनार्थी धन तथा किसी भी प्रकारकी कामनावालेकी कामनापूर्ण हो सकती है इस आनन्दरामायणके मध्यमें स्थित जन्मकाण्ड सन्तानदायक है। जो मनुष्य इसका पारायण करता या सुनता है, उसे सुपुत्रकी प्राप्ति होती है ॥ १४३ ॥ १४४ ॥ इति श्रीमत्शतकोटिरामचरि-तान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये पं० रामतेजपाण्डेयविरचितज्योत्स्ना भाषाटीकासहिते जन्मकाण्डे नवमः सर्गः ॥ ९ ॥
इस जन्मकाण्डमें कुल नौ सर्ग तथा आठ सौ चार श्लोकों द्वारा श्रीरामदासने विष्णुदासको उपदेश दिया है। ॥ १ ॥ उन नवों सर्गोंमें ये कथाएँ वर्णित हैं (१) उपवनदर्शन, (२) उपवनक्रीडा, (३) सीतातत्याग, (४) कुशलवकी उत्पत्ति, (५) रामरक्षा, (६) लव द्वारा कमलहरण, (७) पुत्रोंके साथ रामका संग्राम, (८) सीताका पुनर्ग्रहण और (९) बालकोंका उपनयनसंस्कार ।
इति श्रीमदानन्दरामायणे जन्मकाण्ड समाप्तम् ।
श्रीरामचन्द्रार्पणमस्तु