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श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात

Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)

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DevanagariHindipublished811 pages

Page 227 of 811

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Page 227

सर्गः १ ] उत्तरकाण्डम् २११


मदैर्विचित्रैर्मधुरैस्तथा मादकवस्तुभिः । नानासुगंधतैलेश्च काचकुम्भाः सहस्रशः ॥२७॥
स्थापनीयाश्चन्दनैश्च सुगंधैर्गन्धवादिभिः नानोपकरणैर्युक्तानां ताम्बूलानां सहस्रशः ॥२८॥
स्थापनीयानि पात्राणि चामराणि सहस्रशः । व्यंजनानि विचित्राणि तथाऽऽदर्शा विचित्रिताः ॥२९॥
स्थापनीयाश्च क्रीडार्थं क्रीडोपकल्पणानि च । स्थापनीयानि महत्सु नृपाणां चित्राणि च ॥३०॥
मृत्पात्रसम्भराः कार्याः शतशः पुष्पवाटिकाः । जलप्रणालि कार्याणि सर्वत्र विविधानि च ॥३१॥
नानाविवित्रवर्णानां वयसां पंजराः शुभाः । हेमचूर्णमणिक्लैश्च प्रवालैर्नामरत्नैश्च ॥३२॥
कमनीयाश्च भूषास्तैस्तोषणाद्यैः प्रपूरिताः । वधनीया मंडपेषु नर्तितव्योऽप्सरोगणैः ॥३३॥
धूपयंतु सुधूपैश्च सुगायतु हि गायकाः । वादनीयानि वाद्यानि बहूनि विविधानि च ॥३४॥
पूजोपकरणाद्यैश्च शस्त्राणि संस्थितानि हि । पृथक् पृथक् मञ्चांश्चैव स्थापनीयानि लक्ष्मणः ३५॥
तथा ऋषिसभार्या तु दभांश्च समिधस्तथा । दण्डाः कमण्डलुयुताः स्थापनीयाः सहस्रशः ॥३६॥
परिधायांथ कौपीनान् वल्कलाश्चाजिनानि च । पूजाद्रव्याणि हव्यानि जलकुम्भाः सहस्रशः ॥३७॥
शौचार्थे मृत्तिकाः शुद्धा दंतकाष्ठानि पादुकाः । रोविष्ट मुखशुद्ध्यर्थे नानावस्तूनि कल्पप ॥३८॥
तथा नरासभार्या तु पूजकत्राण्यनेकशः । सौभाग्याद्रव्यरत्नानि सुगंधैः पूजितान्यपि ॥३९॥
वायनान् विचित्राणि स्थापजाय नि लक्ष्मण । कतर्यः कज्जाना च पात्राणि कुंकुमानि च ॥४०॥
करउस्थानि रम्याणि भूषणान्युज्ज्वलानि च । हरिद्रादीनि वस्तूनि कञ्चुक्यो वसनानि च ॥४१॥
धारनीयानि व्यञ्जनचमरादीनि सादयम् । सहृदा लेखनीणानि पत्राणि च सभामतः ॥४२॥


के सह कडाव वहाँ उपस्थित रहें। अनेक प्रकारके इत्र, गुलाबजल, केवड़ाजल, कस्तूरी और केसरका चन्दन सबको लगानेके लिए तैयार रहना चाहिए ॥२५, २६। विविध प्रकारके स्वादिष्ट मद्य तथा अनेक मदकर वस्तुएं जुटाई जायें। बहुत किस्मके सुगन्धित तेलोंसे भरे हुए काँचके हजारों घड़े सदा तैयार रहें। बहुतसे बर्तनोंमें सुगन्धित चन्दन और अत्तर रक्खे रहें। विविध सामग्रियोंके साथ हजारों ताम्बूलोंके थालके बीड़े लगा-लगाकर रक्खे जायें ॥२७॥२८॥ हजारों चँवर हाँकनेके लिए मँगा लेने चाहिये। स्नानके लिए तरह तरहके पक्वान्न सर्वथा तैयार रहें। मुँह देखनेके लिए अच्छे अच्छे दर्पण मँगवा लिये जायें खेलनेके लिए जितनी भी सामग्रियां हो सकें मँगवाकर रख ली जावें। देश विदेशके राजाओंके चित्र मँगवाकर सभाभवनमें आगे और टाँग दिये जावें ॥२९॥३०॥ बहुतसे फूलोंके गमले मँगवाकर वहाँ-पर रक्खे जावें। छोटी-छोटी दूरपर हजारों फौहारे बनाये जायें, जिनसे सदा जलकी धारा बहता रहे तोता, पोले, हरे तथा मैनादि आदि सुहावने पक्षियोंके पिंजड़े लाकर मण्डपमें चारों ओर लटका दिये जावें और हीरा, मोती पन्ना और मूंगा आदिके जड़ाऊ वस्त्रों द्वारा वे सजाये जावें। ३१॥३२॥ जिससव इन पक्षियोंक भोजन करनकी सब सामग्री भरी रहे। वहाँपर नाचनेके लिए सुन्दर सुन्दर वेश्याव बुलायी जायें। धूप देनेवाले लोग सुगन्धित धूप देनके लिए नियुक्त किये जावें। गानवाले लोग गाय और बजानेवाले विविध प्रकारके बाज बजावें ॥३३॥३४। सब राजमण्डलाने अलग-अलग पूजन करनकी सामग्रियोंसे पूर्ण बर्तन रक्खे रहें। ऋषिसभाओंके लिए कुशा, दण्ड, कमण्डलु तथा समिधाका विशेष प्रबन्ध रहे। ऊपर पहननेके लिये वस्त्र और नीचे पहननेके लिये कौपीन, वल्कल वस्त्र, मृगचर्म, पूजनकी सब सामग्रियां, हवन करनकी सब वस्तुएं, जलसे भरे हुए हजारो घड़े बादि वहाँपर ला-लाकर रक्खे जायें। हाथ पवित्र करनेके लिए शुद्ध मृत्तिका, दातौन, खड़ाऊं तथा मुखशुद्धिके लिये बहुतसे मंजन आदि वहींपर रक्खे रहें ॥३५-३८॥ इसी तरह नारीसभाके या पूजाके बहुतसे पात्र रहने चाहिये। सोहागके लिये शुभसूचक रोली-सेंदुर आदि सुगन्धित वस्तुयें भी रक्खी रहें। सुन्दर दर्पण लाकर रख्य जायें। काजलके कुमकुमभरे बर्तन आदि भी वहाँ उपस्थित रहें ॥३९॥४०॥ बहुत-सी बाँसकी बनी हुई सन्दूकोंमें सुन्दर और चमकवाते हुए आभूषण रक्खे रहें। हल्दी-रोली आदि चीजें और कंचुकी आदि वस्त्र लाकर रक्खे जायें। पंखे और चमरादिक