Skip to content
SarvaKosh
अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)

by पारम्परिक लोक संग्रह

Source: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (origin)

DevanagariHindipublished292 pages

Page 137 of 292

Read in context
Page 137

१२३ अकबर बीरबलविनोद
होता है? उसका क्या रंग है।" तब रूपचन्द की आँखें खुलीं
और उसने अपने मन में अनुमान किया कि यह सारा फरेब
भाई का रचा हुआ है। लालच में आकर लाल को अपनी भाभी
को नहीं दिया। अब मेरे पूछने पर उसपर दोषारोपण करता
है।" वह इस फर्याद को लेकर बीरबल के पास गया और
उसकी अदालत में दरख्वास्त लगाई। बीरबल ने एक निश्चित
तिथि पर फूलचन्द को उसके साखियों के सहित तलब किया।
इधर रूपचन्द को भी उसकी स्त्री के सहित बुलाया। पहले
उसने रूपचन्द और उसकी स्त्री का बयान लिया फिर उन्हें
अलग अलग स्थानों पर बैठने की आज्ञा देकर फूलचन्द के
साखियों को तलब किया-जब वे आये तो बीरबल ने पूछा-
"देखो भाई! जो मैं आप लोगों से पूछता हूँ उसका ठीक ठीक
उत्तर देना, नहीं तो यदि बात झूठी जान पड़ेगी तो दोषके उप-
युक्त दण्ड पावोगे। क्या तुमने फूलचन्द को रूपचन्द की स्त्री
को लाल देते हुये अपनी आँखों देखा था?" उन साखियों ने
फूलचन्द का लाल देना स्वीकार किया। तब बीरबलने सोचा-
"यह मसला इस प्रकार नहीं हल होगा। उन पाँचों साखियों
को भी अलग अगल कोठरी में बन्द करवा दिया और बाजार
से मोम मँगवाकर सात सात तोला उन पाँचों को देकर
हुक्म दिया-“अच्छा यदि तुम लोगों ने लाल देते हुए देखा है
तो इस मोम से उसी शक्लका लाल बना डालो। रूपचन्द की
स्त्री को भी लाल की शक्ल बनाने के लिये मोम दिया गया।
जब निर्धारित समय बीतगया और सभों से लाल लेने
की बारी आई तो बीरबल ने पहले उन्हीं दोनों भाइयों का लाल