१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)
108 Upanishads Part 2 - Gyan Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
पृष्ठ 227, कुल 505 में से
संदर्भ में पढ़ें॥ प्रणवापानषद् ॥
नाम के अनुरूप इसमें प्रणव ॐकार का विवेचन किया गया है। ॐकार को परब्रह्म की अक्षराभिव्यक्ति
कहा गया है। इसकी तीन मात्राओं (अ, उ, म्) के साथ त्रिदेव, त्रिकाल, त्रिवेद, तीन अग्नियों की संगति बिठाई
गयी है। इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना सहित ७२ हजार नाड़ियों में ॐकार को संव्याप्त कहा गया है। अन्त में कहा गया है
कि जो साधक ॐकार के माध्यम से ब्रह्म तादात्म्य प्राप्त करते हैं, वे अमृतत्व के अधिकारी हो जाते हैं।
पुरस्ताद्ब्रह्मणस्तस्य विष्णोरद्भुतकर्मणः।
रहस्यं ब्रह्मविद्याया धृताग्निं संप्रचक्षते॥ १॥
अब ब्रह्म स्वरूप भगवान् विष्णु के अद्भुत कर्मों से युक्त, (संचित कर्मों को भस्मसात् करने में
समर्थ) अग्नि को धारण करने वाली ब्रह्मविद्या का रहस्य वर्णित किया जा रहा है॥ १॥
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म यदुक्तं ब्रह्मवादिभिः।
शरीरं तस्य वक्ष्यामि स्थानकालत्रयं तथा॥ २॥
ब्रह्मवेत्ताओं ने ॐकार को ही एक अद्वितीय, अविनाशी ब्रह्म कहा है, उसके शरीर, स्थान और
कालत्रय (भूत, भविष्यत् और वर्तमान) का विवेचन अब किया जाता है॥ २॥
तत्र देवास्त्रयः प्रोक्ता लोका वेदास्त्रयोऽग्नयः।
तिस्त्रो मात्रार्धमात्रा च प्रत्यक्षस्य शिवस्य तत्॥ ३॥
उस ॐकार रूप ब्रह्म में तीन देवता, (ब्रह्मा, विष्णु, महेश), तीन लोक (भूः, भुवः, स्वः), तीन वेद
(ऋक्, यजुष्, साम), तीन अग्नियां (गार्हपत्य, दक्षिणाग्नि, आहवनीय), तीन पूर्ण मात्रा और एक अर्धमात्रा
(अ, उ, म् एवं अनुस्वार) सन्निहित है। वही उसका साक्षात् कल्याणकारी शिव स्वरूप है॥३॥
ऋग्वेदो गार्हपत्यं च पृथिवी ब्रह्म एव च।
अकारस्य शरीरं तु व्याख्यातं ब्रह्मवादिभिः॥ ४॥
ऋग्वेद, पृथ्वी, गार्हपत्य अग्नि और देव ब्रह्मा - ये तत्त्व ब्रह्मवेत्ताओं ने ॐकार के तीन अक्षरों में
अकार के शरीर रूप में बताये हैं॥ ४॥
यजुर्वेदोऽन्तरिक्षं च दक्षिणाग्निस्तथैव च।
विष्णुश्च भगवान् देव उकारः परिकीर्तितः॥ ५॥
यजुर्वेद, अन्तरिक्ष, दक्षिणाग्नि और भगवान् विष्णु ये सब तत्त्व ॐकार के तीन अक्षरों में 'उकार' के
स्वरूप में निरूपित किये गये हैं॥५॥
सामवेदस्तथा द्यौश्चाहवनीयस्तथैव च।
ईश्वरः परमो देवो मकारः परिकीर्तितः॥ ६॥
सामवेद, द्युलोक, आहवनीय अग्नि और महादेव शिव- ये सब ॐकार के तीन अक्षरों में से
'मकार' के स्वरूप में निरूपित हुए हैं॥ ६॥