यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)
Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)
by स्वामी अड़गड़ानन्द
Source: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (origin)
DevanagariHindipublished429 pages
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निवेदन
'यथार्थ गीता' योगेश्वर श्रीकृष्ण की परम पुनीत
वाणी श्रीमद्भगवद्गीता का ही अर्थ है। इसमें आपके हृदय
में स्थित परमात्मा की प्राप्ति के विधान का प्राप्ति के
पश्चात् किया गया चित्रण है। अवहेलना की दृष्टि से
इसका उपयोग वर्जित है, अन्यथा हम अपने लक्ष्य की
जानकारी से वंचित रह जायेंगे। इसके श्रद्धापूर्वक अध्ययन
से मानव अपने कल्याण के साधन से भरपूर हो जाता है
और यत्किंचित् भी ग्रहण करेगा तो परमश्रेय को प्राप्त
कर लेगा; क्योंकि इस ईश्वर-पथ में आरम्भ का कभी
नाश नहीं होता।
– स्वामी अड़गड़ानन्द