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यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)

by स्वामी अड़गड़ानन्द

Source: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (origin)

DevanagariHindipublished429 pages

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अष्टादश अध्याय ३५५
पाँच श्लोकों में भगवान् श्रीकृष्ण ने यह बताया कि गीता का उपदेश अनधिकारियों
को नहीं कहना चाहिये; किन्तु जो श्रद्धावान् है उससे अवश्य कहना चाहिये।
जो सुनेगा, वह भक्त मुझे प्राप्त होगा; क्योंकि अतिगोपनीय कथा को सुनकर
पुरुष चलने लगता है। जो भक्तों में कहेगा, उससे अधिक प्रिय करनेवाला मेरा
कोई नहीं है। जो अध्ययन करेगा, उसके द्वारा मैं ज्ञानयज्ञ से पूजित होऊँगा।
यज्ञ का परिणाम ही ज्ञान है। जो गीता के अनुसार कर्म करने में असमर्थ है;
किन्तु श्रद्धा से मात्र सुनेगा, वह भी पुण्यलोकों को प्राप्त होगा। इस प्रकार
भगवान् श्रीकृष्ण ने इसके कहने, सुनने तथा अध्ययन का फल बताया। प्रश्न
पूरा हुआ। अब अन्त में वे अर्जुन से पूछते हैं कि कुछ समझ में आया?
कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा।
कच्चिदज्ञानसम्मोहः प्रनष्टस्ते धनञ्जय।।७२।।
हे पार्थ! क्या मेरा यह वचन तूने एकाग्रचित्त होकर सुना? क्या तेरा
अज्ञान से उत्पन्न मोह नष्ट हुआ? इस पर अर्जुन बोला-
अर्जुन उवाच
नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत।
स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव।।७३।।
अच्युत! आपकी कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया है। मुझे स्मृति प्राप्त हुई
है। (जो रहस्यमय ज्ञान मनु ने स्मृति-परम्परा से चलाया, उसी को अर्जुन ने
प्राप्त कर लिया।) अब मैं संशयरहित हुआ स्थित हूँ और आपकी आज्ञा का
पालन करूँगा। जबकि सैन्य निरीक्षण के समय दोनों ही सेनाओं में स्वजनों को
देख अर्जुन व्याकुल हो गया था। उसने निवेदन किया- गोविन्द! स्वजनों को
मारकर हम कैसे सुखी होंगे? ऐसे युद्ध से शाश्वत कुलधर्म नष्ट हो जायेगा,
पिण्डोदक-क्रिया लुप्त हो जायेगी, वर्णसंकर उत्पन्न होगा। हमलोग समझदार
होकर भी पाप करने को उद्यत हुए हैं। क्यों न इससे बचने के लिये उपाय करें?
शस्त्रधारी ये कौरव मुझ शस्त्ररहित को रण में मार डालें, वह मरना भी श्रेयस्कर
है। गोविन्द! मैं युद्ध नहीं करूँगा- कहता हुआ वह रथ के पिछले भाग में बैठ
गया था।