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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 65 of 421

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Page 65

पूर्वार्ध पांचवां अध्याय
आपतये त्वा परिपतये गृह्णामि तनूनेप्त्रे शाक्वराय शक्वन ऽ ओजिष्ठाय.
अनाधृष्टमस्यनाधृष्यं देवानामोजो ऽ नभिशस्त्यभिशस्तिपा ऽ अनभिशस्तेन्यमञ्जसा
सत्यमुपगेष १४ स्विते मा धाः.. (५)
हे अग्नि! हम यज्ञ कार्य के लिए आप को ग्रहण करते हैं. आप सर्वव्यापक हैं
और ओजस्वी, सर्वसमर्थ, प्रशंसनीय घृणित ( बुरे ) कामों से हमारी रक्षा करते हैं.
आप किसी को शाप नहीं देते. आप स्वयं भी अभिशप्त नहीं हैं. आप हमें सत्यमार्ग
पर ले चलिए. आप हमारी बुद्धि को श्रेष्ठ कामों में लगाने की कृपा कीजिए. आप
हमारे आधार व रक्षक हैं. ( ५ )
अग्ने व्रतपास्त्वे व्रतपा या तव तनूरिय १४ सा मयि यो मम तनूरेषा सा त्वयि.
सह नौ व्रतपते व्रतान्यनु मे दीक्षां दीक्षापतिर्मन्यतामनु तपस्तपस्पतिः.. (६)
हे अग्नि! आप व्रत के पालनकर्ता हैं. आप का वह व्रत पालन करने वाला
शरीर हमारे साथ एकाकार हो जाए. हे व्रतपति अग्नि! व्रतों का यजमान अनुकरण
करने की कृपा करें. हम भी आप के साथ ( आप जैसे ) व्रतपति हो जाएं. सोम
दीक्षापति हैं. सोम दीक्षा के पालनहार हैं. उन से हम एकाकार हो जाएं. आप तप के
स्वामी हैं. हम तप करने वाले हैं. ( आप की कृपा से ) हम आप से एकाकार हो
जाएं. ( ६ )
अ १४ शुर १४ शुष्टे देव सोमाप्यायतामिन्द्रायैकधनविदे.
आ तुभ्यमिन्द्रः प्यायतामा त्वमिन्द्राय प्यायस्व.
आप्याययास्मानत्सखीन्त्सन्या मेधया स्वस्ति ते देव सोम सुत्यामशीय.
एष्टा रायः प्रेषे भगाय ऋतमृतवादिभ्यो नमो द्यावापृथिवीभ्याम्.. (७)
हे सोम! आप की सोमबेल इंद्र के लिए बढ़ोतरी पाने की कृपा करे. इंद्र धन
वेत्ता ( जानने वाले ) हैं. वे आप को पी कर तृप्त हों. आप उन के पीने ( सेवन ) के
लिए बढ़ोतरी पाने की कृपा करें. आप अपने सखा यजमान को तृप्त करने की कृपा
करें. सोम का कल्याण हो. हम अपनी मेधा ( बुद्धि ) से सोम हेतु किए जा रहे यज्ञ
और इन स्तुतियों को शीघ्र पूरा करें. आप हमारे लिए इष्ट ( प्रिय ) धन भेजने की
कृपा कीजिए. अग्नि की कृपा से हम सत्यवादी हों. इंद्र की कृपा से हम अमरता
प्राप्त करें. हम स्वर्गलोक को नमन करते हैं. हम पृथ्वीलोक को नमन करते हैं. ( ७ )
या ते अग्ने ऽ यःशया तनूर्वर्षिष्ठा गह्वरेष्ठा.
उग्रं वचो अपावधीत्तेषं वचो अपावधीत्स्वाहा.
या ते अग्ने रजःशया तनूर्वर्षिष्ठा गह्वरेष्ठा.
उग्रं वचो अपावधीत्तेषं वचो अपावधीत्स्वाहा.
या ते अग्ने हरिशया तनूर्वर्षिष्ठा गह्वरेष्ठा.
उग्रं वचो अपावधीत्तेषं वचो अपावधीत्स्वाहा.. (८)
यजुर्वेद - ६५