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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 56 of 421

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Page 56

चौथा अध्याय
एदमगन्म देवयजनं पृथिव्या यत्र देवासो अजुषन्तविश्वे.
ऋक्सामभ्या ᳪ सन्तरन्तो यजुर्भी रायस्पोषेण समिषा मदेम.
इमा ऽ आपः शमु मे सन्तु देवीरोषधे त्रायस्व स्वधिते मैनं ᳪ हि ᳪ सी:.. (१)
जिस यज्ञ स्थान पर सारे देवता प्रसन्न होते हैं, हम सभी यजमान उसी स्थल पर
इकट्ठे हुए हैं. ऋग्वेद और सामवेद के मंत्रों से हम यज्ञ के पार जाते हैं. यजुर्वेद के
मंत्रों से यज्ञ करते हुए हम धन और पोषण प्राप्त करते हैं. ये जल हमारे लिए
शांतिदायी हों. दिव्य गुणों वाली ओषधियां हमें रोगों से बचाएं. ये अस्त्रशस्त्र
(अनावश्यक) हिंसाकारी न हों. (१)
आपो अस्मान्मातरः शुन्धयन्तु घृतेन नो घृतप्वः पुनन्तु.
विश्वं ᳪ हि रिप्रं प्रवहन्ति देवीरुदिदाभ्यः शुचिरा पूत एमि.
दीक्षातपसोस्तनूरसि तां त्वा शिवा ᳪ शग्मां परि दधे भद्रं वर्णं पुष्यन्.. (२)
जल हमारी मां है. जल हमें शोधित (शुद्ध) करने की कृपा करे. घी से
जो जल झरता है, वह हमें पवित्र करने की कृपा करे. प्रवाहित होता हुआ
जल सभी पापों को धो दे. जल से हम शुद्ध और पवित्र होते हैं. हे रेशमी वस्त्र! आप
दीक्षातपस देव का शरीर हो. आप कोमल, सुखद, कल्याणकारी व श्रेष्ठ (सुंदर)
रंग वाले हैं. हम आप को (यज्ञ में) धारण करते हैं. (२)
महीनां पयोसि वर्चोदा ऽ असि वर्चो मे देहि.
वृत्रस्यासि कनीनकश्चक्षुर्दा ऽ असि चक्षुर्मे देहि.. (३)
आप गायों का दूध हैं. आप वर्चस्व (चमक) देने वाले हैं. आप हमें वर्चस्व
प्रदान कीजिए. आप वृत्र की आंख की पुतली हैं. आप आंख देने वाले हैं. आप हमें
आंख प्रदान कीजिए. (३)
चित्पतिर्मा पुनातु वाक्पतिर्मा पुनातु देवो मा सविता पुनात्वच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य
रश्मिभिः.
तस्य ते पवित्रपते पवित्रपूतस्य यत्कामः पुने तच्छकेयम्.. (४)
५६ - यजुर्वेद