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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 360 of 421

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उत्तरार्ध तीसवां अध्याय
वायु को सहने के लिए चांडाल को, अधर में लटकने जैसे काम के लिए बांस पर
नृत्य करने वाले को नियुक्त करना चाहिए. स्वर्गलोक हेतु खगोल विज्ञानी को, सूर्य
हेतु हरे रंग वाले को, नक्षत्रों के लिए नारंगी रंग जानने वाले को, चंद्रमा हेतु किलास
( चर्म रोग विशेष ) वाले को, सफेद रंग हेतु पीली आंख वाले को, रात्रि के लिए
कालीपीली आंखों वालों को नियुक्त किया जाना चाहिए. ( २१ )
अथैतानष्टौ विरूपान लभतेतिदीर्घ चातिह्रस्वं चातिस्थूलं चातिकृशं चातिशुक्लं
चातिकृष्णं चातिकुल्वं चातिलोमशं च.
अशूद्रा ऽ अब्राह्मणास्ते प्राजापत्याः मागधः पुँश्चली कितवः क्लीबोशूद्रा ऽ
अब्राह्मणास्ते प्राजापत्याः.. (२२)
इस प्रकार इन आठों अति दीर्घ, अतिह्रस्व, अतिस्थूल, अतिकृश, अतिशुक्ल,
अतिकृष्ण, रोम रहित व रोम सहित को तथा इन चार प्रकार के चाटुकार,
चरित्रहीन, जुआरी, नपुंसक ऐसे ब्राह्मणत्वहीन अशूद्र प्रजापालक को सौंप देना
चाहिए. ( २२ )
३६० – यजुर्वेद