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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 341 of 421

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Page 341

उत्तरार्ध अट्ठाईसवां अध्याय
इन दोनों देवों को हवि भेंट करें. यजमान इन दोनों देवों के लिए यज्ञ करने की कृपा
करें. ( ३२ )
होता यक्षद्वनस्पति १७ शमितार १४ शतक्रतु १४ हिरण्यपर्णमुक्थिन १४ रशनां बिभ्रतं वशिं
भगमिन्द्रं वयोधसम्.
ककुभं छन्द ऽ इहेन्द्रियं वशां वेहतं गां वयो दधद्वेत्वाज्यस्य होतर्यज.. ( ३३ )
होता ने इंद्र देव के लिए यज्ञ किया. वनस्पति देव शांतिदायी, सैकड़ों यज्ञ करने
वाले, सोने के पत्तों वाले, चाबुकधारी, आयुवर्धक व सौभाग्यदायी हैं. यजमान ने
वनस्पति देव के लिए यज्ञ किया. हम यजमान ककुभ छंद से इन दोनों देवों की
उपासना करते हैं. इंद्रिय शक्ति से उन की उपासना करते हैं. वंध्या गायों को धारण
करते हैं. वनस्पति और इंद्र देव आहुति स्वीकारने की कृपा करें. यजमान इन के
लिए हवन करें. ( ३३ )
होता यक्षत्स्वाहाकृतीरग्निं गृहपतिं पृथग्वरुणं भेषजं कविं क्षत्रमिन्द्रं वयोधसम्.
अतिच्छन्दसं छन्द ऽ इन्द्रियं बृहदृषभं गां वयो दधद्व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज.. ( ३४ )
होता अग्नि के लिए यज्ञ करते हैं. अग्नि बलवान, आयुधारी, गृहपति, वैद्य,
कवि व स्वाहायुक्त हैं. हम छंदस छंद से अग्नि और इंद्र देव की उपासना करते हैं.
दोनों देव हवि स्वीकारने की कृपा करें. हम इंद्रिय शक्ति से उन की उपासना करते
हैं. यजमान दोनों देवों के लिए यज्ञ करें. ( ३४ )
देवं बर्हिर्वयोधसं देवमिन्द्रमवर्धयत्.
गायत्र्या छन्दसेन्द्रियं चक्षुरिन्द्रे वयो दधद्वसुवने वसुधेयस्य वेतु यज.. ( ३५ )
इंद्र देव कुश के आसन पर विराजते हैं. वे आयुवर्द्धक हैं. देवताओं ने उन की
बढ़ोत्तरी की. हम गायत्री छंद से इंद्र देव की उपासना और अपनी नेत्र शक्ति से उन
का ध्यान धरते हैं. वे ऐश्वर्य धारण करते हैं. वे धन प्रदान करते हैं. यजमान इंद्र देव
के लिए यज्ञ करें. ( ३५ )
देवीर्द्वारो वयोधस १७ शुचिमिन्द्रमवर्धयन्.
उष्णिहा छन्दसेन्द्रियं प्राणमिन्द्रे वयो दधद्वसुवने वसुधेयस्य व्यन्तु यज.. ( ३६ )
हे होता! आप इंद्र देव के लिए यज्ञ करते हैं. देवियों ने उन की आयु व पवित्रता
की बढ़ोत्तरी की. हम उष्णिफ् छंद में उन की उपासना करते हैं. हम उन को प्राण
देते हैं. वे हमारे लिए धन धारते हैं. वे हमें धन प्रदान करने की कृपा करें. होता उन
के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. ( ३६ )
देवी उषासानक्ता देवमिन्द्रं वयोधसं देवी देवमवर्धताम्.
अनुष्टुभा छन्दसेन्द्रियं बलमिन्द्रे वयो दधद्वसुवने वसुधेयस्य वीतां यज.. ( ३७ )
यजुर्वेद - ३४१