यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextउत्तरार्ध छब्बीसवां अध्याय
वैश्वानर यहां पधारें, वैश्वानर सब ओर से अपने रक्षा साधनों से हमारी रक्षा
करने की कृपा करें. उक्थ रूपी वाहन द्वारा अग्नि की उपासना करते हैं. हम आप
को उपयाम में ग्रहण करते हैं. वही आप का मूल स्थान है. (८)
अग्निर्ऋषिः पवमानः पाञ्चजन्यः पुरोहितः.
तमीमहे महागयम्.
उपयामगृहीतोस्यग्नये त्वा वर्चस ऽ एष ते योनिरग्नये त्वा वर्चसे.. (९)
हे अग्नि! आप ऋषि, पवित्र और पांचों वर्णों के पुरोहित हैं. हम आप को चाहते
हैं. हम आप के लिए स्तोत्र गाते हैं और उपयाम में ग्रहण करते हैं. वही आप का मूल
स्थान है. आप वर्चस्वी हैं. हम भी अग्नि से वर्चस्व पाना चाहते हैं. (९)
महाँ २ इन्द्रो वज्रहस्तः षोडशी शर्म यच्छतु.
हन्तु पाप्मानं योस्मान्द्वेष्टि.
उपयामगृहीतोसि महेन्द्राय त्वैष ते योनिर्महेन्द्राय त्वा.. (१०)
हे इंद्र देव! आप महान् और हाथ में वज्र रखते हैं. आप सोलह कलाओं वाले
हैं. आप हमें सुख देने की कृपा कीजिए. जो हम से द्वेष करते हैं, आप उन पापियों
को नष्ट करने की कृपा करें. इंद्र देव की प्रसन्नता के लिए अग्नि को उपयाम में
ग्रहण किया जाता है. वही आप का मूल स्थान है. हम वहीं आप की प्रतिष्ठा करते
हैं. (१०)
तं वो दस्ममृतीषहं वसोर्मन्दानमन्धसः.
अभि वत्सं न स्वसरेषु धेनव ऽ इन्द्रं गीर्भिर्नवामहे.. (११)
हे यजमानो! इंद्र देव धनवान, आनंददाता, आवास दाता और अन्नदाता हैं. हम
आप के पुत्र उसी तरह वाणी से आप को पुकारते हैं, जैसे गाएं बछड़ों के लिए
रंभाती हैं. (११)
यद्वाहिष्ठं तदग्नये बृहदर्च विभावसो. महिषीव त्वद्रयिस्त्वद्वाजा ऽ उदीरते.. (१२)
हे यजमानो! आप अग्नि के लिए स्तुति कीजिए. आप विशाल, वर्चस्वी,
प्रकाशमान व महारानी की तरह उदार हैं. आप अन्न और बल प्रदान करने की कृपा
कीजिए. (१२)
एह्यू षु ब्रवाणि तेग्न ऽ इत्थेतरा गिरः. अभिर्वधर्धास ऽ इन्दुभिः.. (१३)
हे अग्नि! आप आइए. हम आप के लिए इस प्रकार वाणी से उपासना करते
हैं. आप सोमरस से बढ़ोतरी पाते हैं. (१३)
ऋतवस्ते यज्ञं वि तन्वन्तु मासा रक्षन्तु ते हविः.
संवत्सरस्ते यज्ञं दधातु नः प्रजां च परिपातु नः.. (१४)
३२४ - यजुर्वेद